संसद के मानसून सत्र को खत्म होने में अब सिर्फ चार दिन का समय बचा है, लेकिन सोमवार के एजेंडे में कई ऐसे अहम विधेयक शामिल नहीं हैं, जिन पर इस सत्र में सरकार के कदम उठाने की उम्मीद की जा रही थी। संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हुआ था और 21 अगस्त तक चलना निर्धारित है, हालांकि, स्वतंत्रता दिवस के कारण 13 और 14 अगस्त को सदन की कार्यवाही नहीं होगी।
130वें संविधान संशोधन विधेयक पर अभी भी नजर
इनमें सबसे ज्यादा चर्चा 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर है। इस विधेयक का उद्देश्य प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिनों तक हिरासत में रहने की स्थिति में पद से हटाने की व्यवस्था करना है। विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति में विचार चल रहा है और फिलहाल इसे संसद के मौजूदा विधायी एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है। इस विधेयक को लेकर राजनीतिक स्तर पर पहले से ही काफी बहस हो चुकी है। प्रस्ताव के अनुसार, यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री ऐसे अपराध के आरोप में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, जिसमें कम से कम पांच साल की सजा का प्रावधान है, तो उसके पद पर बने रहने को लेकर संवैधानिक व्यवस्था लागू होगी। 2025 में पेश किए गए इस विधेयक को बाद में संयुक्त समिति के पास भेजा गया था।
महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संशोधन भी एजेंडे से बाहर
इसके अलावा 131वें संविधान संशोधन विधेयक का नाम भी मौजूदा एजेंडे में नहीं है। यह प्रस्ताव लोकसभा सीटों के परिसीमन के जरिए महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस विधेयक का पहले वाला संस्करण संसद में खारिज हो चुका है और सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इसका संशोधित रूप इसी सत्र में पेश किया जाएगा या नहीं।
पांच नए विधेयकों पर हो सकती है चर्चा
मानसून सत्र के लिए सरकार की ओर से करीब पांच नए विधेयकों पर काम आगे बढ़ाने की योजना है। इनमें टैक्स से जुड़े प्रावधानों, न्यायपालिका, MSME, नागरिक पंजीकरण और राष्ट्रीय सम्मान से संबंधित विषय शामिल हैं। इनके अलावा कुछ लंबित विधेयकों को भी सदन में विचार और पारित करने के लिए लाया जा सकता है।
लंबित विधेयकों में Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 भी शामिल है। यह विधेयक विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाने से संबंधित है और इसे बजट सत्र में पेश किया गया था। इसके अलावा Viksit Bharat Education Establishment Bill, 2025 भी लंबित विधेयकों में है, जिस पर संयुक्त संसदीय समिति विचार कर रही है।
अनुपूरक अनुदान पर भी हो सकती है चर्चा
सरकार की ओर से 2022-23 के लिए Supplementary Grants की मांग को भी चर्चा और मतदान के लिए लाए जाने की संभावना है। ऐसे में सत्र के बचे हुए दिनों में सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय काम पूरे करने की चुनौती है।
स्वतंत्रता दिवस के कारण कम होंगे कामकाजी दिन
संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक प्रस्तावित है, लेकिन 13 और 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोहों के कारण संसद में बैठक नहीं होगी। इसका मतलब है कि सत्र के आखिरी चरण में सरकार के पास विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए सीमित कामकाजी दिन बचेंगे। ऐसे में सोमवार के एजेंडे में कई महत्वपूर्ण विधेयकों का शामिल न होना राजनीतिक और संसदीय नजरिए से अहम माना जा रहा है। खासकर 130वें और 131वें संविधान संशोधन विधेयकों को लेकर आगे की रणनीति पर सबकी नजर बनी हुई है। अब देखना होगा कि सत्र के अंतिम दिनों में सरकार इनमें से किन विधेयकों को सदन के पटल पर लाती है और किन प्रस्तावों को आगे के लिए टाल दिया जाता है।