NEWS PR डेस्क: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कार्रवाई के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2026 में ब्यूरो ने महज 20 अगस्त तक 100 प्राथमिकी दर्ज कर ली हैं। पिछले 25 वर्षों में इतनी कम अवधि में 100 कांड दर्ज करने का यह नया रिकॉर्ड है।

निगरानी के अनुसार, इस साल दर्ज 100 मामलों में 90 कांड ट्रैप से जुड़े हैं। इसके अलावा आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य मामले भी दर्ज किए गए हैं।
25 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
पिछले 25 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल 10 वर्षों में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 100 या उससे अधिक कांड दर्ज किए हैं। वर्ष 2006, 2014 और 2015 में 100वां कांड दिसंबर में दर्ज हुआ था।वहीं, वर्ष 2008, 2017 और 2025 में 100वां मामला नवंबर में दर्ज किया गया। वर्ष 2009 और 2016 में अक्टूबर महीने में 100 कांड पूरे हुए थे।इससे पहले सबसे कम समय में 100वां कांड दर्ज करने का रिकॉर्ड वर्ष 2007 के नाम था। उस साल 28 अगस्त को 100वां कांड दर्ज किया गया था। अब 2026 में 20 अगस्त को ही यह आंकड़ा पार कर नया रिकॉर्ड बना दिया गया है।
100 मामलों में 90 ट्रैप केस
निगरानी की कार्रवाई में ट्रैप मामलों की संख्या सबसे अधिक है। वर्ष 2026 में अब तक दर्ज 100 मामलों में 90 मामले ट्रैप के हैं। इन मामलों में रिश्वत लेते या मांगते सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।निगरानी के मुताबिक, इस साल अब तक 90 घूसखोर लोकसेवकों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पिछले साल दर्ज हुए थे 101 ट्रैप कांड
वर्ष 2025 में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कुल 101 ट्रैप कांड दर्ज किए थे। इन मामलों में करीब 37 लाख 80 हजार रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई थी।वर्ष 2026 में अभी तीन महीने से अधिक समय बाकी है। ऐसे में निगरानी की मौजूदा कार्रवाई को देखते हुए पिछले वर्ष के 101 ट्रैप मामलों के आंकड़े को पार करने की संभावना जताई जा रही है।
2026 में अब तक 17 भ्रष्टाचारियों को सजा
भ्रष्ट लोकसेवकों को न्यायालय से सजा दिलाने के मामले में भी निगरानी की कार्रवाई जारी है। 21 अगस्त 2026 तक भ्रष्टाचार से जुड़े 17 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है।यह आंकड़ा पिछले 25 वर्षों में तीसरा सबसे अधिक है। इससे पहले वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा 30 मामलों में सजा सुनाई गई थी।निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की लगातार कार्रवाई से भ्रष्टाचार के मामलों में प्राथमिकी, गिरफ्तारी और सजा के आंकड़ों में तेजी देखने को मिल रही है।