बिहार में ईंट-भट्ठों के बकाया राजस्व की वसूली को लेकर राज्य सरकार ने एकमुश्त समाधान योजना (One Time Settlement) को मंजूरी दी है। खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में योजना की विस्तृत जानकारी दी। योजना के तहत पात्र ईंट-भट्ठा संचालकों को बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान करने पर ब्याज की राशि में बड़ी राहत मिलेगी।
20 दिसंबर तक मिलेगा योजना का लाभ
सरकार की यह योजना 21 सितंबर 2026 से 20 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। इसके तहत उन्हीं ईंट-भट्ठों को शामिल किया जाएगा, जिनके स्वामित्व शुल्क की राशि जमा नहीं करने के कारण 31 अगस्त 2026 तक नीलाम पत्र वाद दायर किया जा चुका है।
योजना के तहत नीलाम पत्र वाद के लिए भेजी गई अधियाचना में दर्ज कुल बकाया राशि में से ब्याज की राशि को छोड़कर मूल बकाया राशि जमा करनी होगी। निर्धारित राशि जमा होने के बाद खान एवं भूतत्व विभाग के अधिकारी संबंधित नीलाम पत्र पदाधिकारी को लिखित रूप से सूचित करेंगे कि अब संबंधित देनदार पर कोई ‘लोक मांग बकाया’ नहीं है। इसके आधार पर नीलाम पत्र वाद का निस्तारण किया जा सकेगा।
289.38 करोड़ रुपये राजस्व अभी लंबित
प्रेसवार्ता में विभाग की ओर से बताया गया कि ईंट-भट्ठों से 316.66 करोड़ रुपये के राजस्व संग्रहण का मामला लंबित था। इसमें से अब तक 27.28 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। इस तरह वर्तमान में 289.38 करोड़ रुपये की राशि राजस्व संग्रहण के लिए लंबित है।
सरकारी घोषणा के अनुसार, निर्धारित अवधि में राशि जमा करने पर लंबित राशि में शामिल करीब 85 करोड़ रुपये की ब्याज राशि माफ की जाएगी।
हालांकि, एकमुश्त समाधानित राशि पर जिला खनिज फाउंडेशन (DMF), आयकर एवं अन्य लागू करों का भुगतान करना भी आवश्यक होगा। इसके बाद ही संबंधित खनन पदाधिकारी द्वारा नीलाम पत्र पदाधिकारी को आवश्यक प्रतिवेदन दिया जाएगा।
विभाग ने बताया कि सभी खनिज विकास पदाधिकारियों को योजना के क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
DMF नियमावली में भी बड़ा बदलाव
प्रेसवार्ता के दौरान मंत्री ने बिहार जिला खनिज फाउंडेशन (संशोधन) नियमावली, 2026 की स्वीकृति के संबंध में भी जानकारी दी। संशोधित नियमावली के तहत खनन प्रभावित क्षेत्रों में DMF की राशि के उपयोग के प्रावधानों में बदलाव किया गया है।
प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में अब 70% DMF राशि
बिहार जिला खनिज फाउंडेशन नियमावली, 2018 के तहत उच्च प्राथमिकता वाले यानी प्रत्यक्ष रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों में DMF की 60 प्रतिशत राशि, जबकि निम्न प्राथमिकता वाले यानी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में 40 प्रतिशत राशि खर्च की जाती थी।
संशोधन के बाद अब:
70% DMF राशि उच्च प्राथमिकता वाले, प्रत्यक्ष रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों में खर्च की जा सकेगी।
30% राशि निम्न प्राथमिकता वाले, अप्रत्यक्ष रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों में उपयोग की जा सकेगी।
सांसद और विधायक भी होंगे DMF न्यास पर्षद के सदस्य
संशोधित नियमावली में DMF न्यास पर्षद की संरचना में भी बदलाव किया गया है। वर्ष 2018 की नियमावली में सांसद, विधायक और विधान परिषद् सदस्य न्यास पर्षद के सदस्य के रूप में शामिल नहीं थे। अब सांसद, विधायक और विधान परिषद् सदस्य भी सदस्य के रूप में शामिल होंगे।
सरकार के अनुसार, इससे लोक कल्याणकारी योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर जोर
संशोधित नियमावली लागू होने के बाद खनन प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न विकासात्मक और कल्याणकारी परियोजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने का लक्ष्य है। साथ ही खनन के दौरान और उसके बाद पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने तथा प्रभावित लोगों के लिए दीर्घकालिक और स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है
ईंट-भट्ठों से लेकर DMF तक बड़ा फैसला,बिहार सरकार ने किए कई अहम बदलाव