NEWS PR डेस्क :लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर उनके बेटे और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भावुक नजर आए। पिता को याद करते हुए चिराग पासवान ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा कि आज वह जिस भूमिका में हैं, उसमें उन्हें समझ आता है कि उनके पिता पार्टी, परिवार और लाखों लोगों की उम्मीदों की जिम्मेदारी एक साथ संभालते थे।
चिराग पासवान ने लिखा, “पापा जी, आज इस भूमिका में आकर समझ आता है कि पार्टी, परिवार और लाखों उम्मीदों की जिम्मेदारी आप उठाते थे – और फिर भी दीदी और मेरे लिए आपके पास हमेशा समय था। काश, एक बार फिर आपके गले लग पाते।”

लखनऊ में आयोजित होगी श्रद्धांजलि सभा
रामविलास पासवान की पुण्यतिथि के मौके पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम आज सुबह 11:30 बजे दयालबाग स्थित एन इको रिसॉर्ट में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम की जानकारी चिराग पासवान ने अपने सोशल मीडिया हैंडल के जरिए साझा की है। पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ इस मौके पर रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
‘पापा इतनी जल्दी चले जाएंगे, कभी नहीं सोचा था’
अपने पिता को याद करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि उनके पिता इतनी जल्दी चले जाएंगे उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी, लेकिन आज उनकी छठी पुण्यतिथि है। चिराग के मुताबिक, पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की मांग पर इस बार उत्तर प्रदेश में रामविलास पासवान की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इससे पहले उनकी जयंती भी उत्तर प्रदेश में आयोजित की गई थी।
पार्टी के स्थापना दिवस की भी तैयारी
चिराग पासवान ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में पार्टी का स्थापना दिवस भी मनाया जा सकता है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इस आयोजन को लेकर तैयारियां चल रही हैं। रामविलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना कर बिहार की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई थी। लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
पिता की विरासत संभाल रहे चिराग पासवान
रामविलास पासवान के निधन के बाद चिराग पासवान उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। अपने पिता को याद करते हुए चिराग कई मौकों पर कह चुके हैं कि उनके लिए रामविलास पासवान सिर्फ पिता ही नहीं, बल्कि उनके सबसे बड़े राजनीतिक मार्गदर्शक भी थे।