हनुमान जयंती पर महावीर मंदिर में होगा भव्य आयोजन, 51 किलो का लड्डू बनेगा मुख्य प्रसाद

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क :पटना। हनुमान जयंती के पावन अवसर पर महावीर मंदिर, पटना में शुक्रवार को प्रातः कलश स्थापना के साथ श्रीरामचरितमानस नवाह पाठ का शुभारंभ हुआ। मंदिर के ऊपरी तल पर स्थित स्थायी मंडप में मिथिला की 11 सदस्यीय मंडली द्वारा नौ दिनों तक नवाह पाठ किया जा रहा है। इसकी पूर्णाहुति हनुमान जयंती के दिन होगी।

इस वर्ष नवाह पाठ के यजमान श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल हैं, जबकि पुरोहित की भूमिका आचार्य पंडित जटेश झा निभा रहे हैं।

हनुमान जयंती के अवसर पर 07 नवंबर को महावीर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। इस दिन हनुमानजी के दरबार का लाल गुलाब के फूलों से भव्य श्रृंगार किया जाएगा। साथ ही 51 किलोग्राम का विशाल नैवेद्यम लड्डू तैयार किया जाएगा, जिसे भगवान को भोग अर्पित करने के बाद श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जाएगा।

श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इसके तहत बड़ी संख्या में सरकारी और निजी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।

महावीर मंदिर में कार्तिक मास में क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती?
हनुमानजी की आराधना भारत में विभिन्न स्वरूपों और परंपराओं के अनुसार होती रही है। कहीं उनकी एकमुखी स्वरूप में पूजा होती है, तो कहीं पंचमुखी हनुमानजी की आराधना की जाती है। इसी प्रकार हनुमान जयंती मनाने की तिथियों में भी अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य की परंपरा में हनुमानजी की जयंती कार्तिक मास में मनाई जाती है, जबकि दक्षिण भारत की परंपरा में चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाने का विधान है। यह विविधता भारत की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाती है।

भगवान श्रीसीताराम के परम भक्त, अंजनानंदन हनुमानजी की जन्मतिथि का उल्लेख विभिन्न पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में अलग-अलग रूपों में मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कल्पभेद के आधार पर इन सभी तिथियों को मान्यता प्राप्त है।

अगस्त्य संहिता के नाम से प्रचलित एक श्लोक के अनुसार हनुमानजी का जन्म कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हुआ था। वहीं वायु पुराण में भी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को स्वाति नक्षत्र और मेष लग्न में भगवान शिव के माता अंजना के गर्भ से प्रकट होने का उल्लेख मिलता है।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य द्वारा रचित ग्रंथ ‘श्री वैष्णवमताब्जभास्कर’ में भी हनुमानजी की जन्मतिथि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी बताई गई है। इसी धार्मिक मान्यता और रामानंदाचार्य की परंपरा का पालन करते हुए पटना के महावीर मंदिर में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को विधि-विधान से हनुमान जयंती मनाई जाती है।

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