NEWS PR डेस्क: पटना। बिहार ने कृषि निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए शनिवार को बिहटा ड्राई पोर्ट से 5 टन मखाना चीन के लिए रवाना किया। यह खेप कोलकाता बंदरगाह के रास्ते समुद्री मार्ग से चीन पहुंचेगी। पिछले छह महीनों में राज्य से 120 टन मखाना विभिन्न देशों को निर्यात किया जा चुका है, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है।
राज्य में मखाना विकास बोर्ड की सक्रियता और APEDA के कार्यालय की स्थापना के बाद निर्यात गतिविधियों को नई गति मिली है। यह उपलब्धि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, बिहार सरकार और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के समन्वित प्रयासों से संभव हुई है।
बिहार विश्व में मखाना का सबसे बड़ा उत्पादक है। मिथिला क्षेत्र के मखाना को GI टैग प्राप्त है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत हुई है। हाल के महीनों में अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड, चीन और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों ने बिहार से मखाना आयात किया है। जनवरी 2026 में 2 मीट्रिक टन मखाना दुबई भेजा गया था।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन में मखाना ‘कियान शी’ के नाम से जाना जाता है और इसका उपयोग खाद्य पदार्थों के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धति (TCM) में भी होता है। किडनी संबंधी उपचार में इसका इस्तेमाल होने से वहां इसकी मांग स्थिर बनी हुई है।
लो कैलोरी, हाई फाइबर और ग्लूटेन-फ्री गुणों के कारण मखाना की वैश्विक बाजार में मांग तेजी से बढ़ी है। अमेरिका इसका सबसे बड़ा खरीदार रहा है, हालांकि पिछले वर्ष टैरिफ संबंधी नीतियों के कारण निर्यात प्रभावित हुआ था और वहां कीमतें 10 से 15 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं। ऐसे में बिहार के निर्यातक अब नए बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।
अलग HS कोड मिलने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मखाना की स्वतंत्र पहचान बनी है, जिससे निर्यात प्रक्रिया और सुगम होने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो बिहार का मखाना वैश्विक सुपरफूड बाजार में और मजबूत स्थिति बना सकता है।