बिहार के टोल पर अब ऑटोमैटिक ई-डिटेक्शन सिस्टम, बीमा और फिटनेस प्रमाण पत्र न होने पर होगा नोटिस

Neha Nanhe
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NEWS PR डेस्क : बिहार में टोल से गुजरने वाले वाहन मालिकों के लिए चेतावनी जारी है। राज्य के 32 टोल प्लाजा पर अब स्वचालित ई-डिटेक्शन सिस्टम (Automatic E-Detection System) गाड़ियों पर निगरानी रख रहा है। सिर्फ पिछले एक महीने में ही विभाग ने 6 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला है।

परिवहन विभाग लगातार वाहनों की फिटनेस और बीमा प्रमाणपत्र की जांच कर रहा है। यदि कोई वाहन इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो सिस्टम तुरंत नोटिस जारी कर सकता है। वाहन मालिकों को सलाह दी जा रही है कि टोल पार करने से पहले बीमा और फिटनेस प्रमाण पत्र जरूर चेक कर लें, ताकि अनावश्यक जुर्माने और परेशानी से बचा जा सके।

बिहार परिवहन विभाग अब राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थापित स्वचालित ई-डिटेक्शन सिस्टम के जरिए हर माह लगभग 6 करोड़ रुपये के चालान जारी कर रहा है। यह सिस्टम टोल प्लाजा से गुजरते समय वाहनों की फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा दस्तावेज और प्रदूषण नियंत्रण (PUC) प्रमाण पत्र जैसी आवश्यकताओं की जांच करता है। अगर कोई दस्तावेज अपडेट नहीं है या समाप्त हो चुका है, तो सिस्टम स्वतः ही चालान जारी कर देता है। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना और वाहन मालिकों को नियमों का पालन सुनिश्चित कराना है।

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बिहार में कितने टोल प्लाजा शामिल हैं ?

वर्तमान में बिहार के 32 टोल प्लाजा इस ई-डिटेक्शन सिस्टम से लैस हैं। विभाग आने वाले महीनों में नौ और टोल प्लाजा पर इसे लागू करने की तैयारी कर रहा है। यह डिजिटल प्रणाली अगस्त 2024 में शुरू हुई थी और तब से जैसे-जैसे डेटा एकत्र और सत्यापित हुआ, उल्लंघनों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई।

अगस्त 2024 से सितंबर 2025 के बीच कुल 1,49,490 ई-चालान जारी किए गए, जिन पर लगभग 80 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। हालांकि, अभी तक केवल 25% राशि ही वसूल की जा सकी है। अब जिला परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे उन वाहन मालिकों की पहचान करें जिन्होंने अपने चालान का भुगतान नहीं किया और उनके खिलाफ कार्रवाई करें।

कैसे काम करता है सिस्टम?

यह प्रणाली राष्ट्रीय सूचना केंद्र के तकनीकी सहयोग से विकसित की गई है और केंद्रीय डेटाबेस से जुड़ी है। जब कोई वाहन टोल प्लाजा से गुजरता है, तो कैमरा उसकी नंबर प्लेट या फास्टैग स्कैन करता है। सिस्टम तुरंत वाहन के रिकॉर्ड की जांच करता है और यदि कोई दस्तावेज़ गायब या समाप्त हो गया है, तो स्वचालित ई-चालान जारी कर दिया जाता है।

अधिकारियों के अनुसार यह तकनीक मैनुअल जाँच कम करती है, पारदर्शिता बढ़ाती है और वाहन मालिकों को स्पष्ट संदेश देती है कि अधूरे या समाप्त दस्तावेज़ तुरंत पकड़ में आ सकते हैं। भविष्य में और अधिक टोल प्लाजा को इस प्रणाली में शामिल करने से विभाग को पूरे बिहार में नियमों के कड़ाई से पालन और सुरक्षित सड़कें सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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