आईपीएस सुनील नायक के पटना आवास पर आंध्रप्रदेश पुलिस की छापेमारी, हत्या व प्रताड़ना मामले में गिरफ्तारी की तैयारी

Neha Nanhe
- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

NEWS PR डेस्क : आंध्रप्रदेश विधानसभा के डिप्टी स्पीकर से जुड़े कथित हत्या प्रयास और हिरासत में प्रताड़ना के मामले में बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी सुनील नायक के ठिकाने पर आंध्रप्रदेश पुलिस ने छापेमारी की है। इस कार्रवाई को मामले में जांच की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मौजूदा विधानसभा डिप्टी स्पीकर के. रघुराम कृष्ण राजू  से जुड़े कथित हत्या प्रयास और हिरासत में प्रताड़ना मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी सुनील नायक के ठिकाने पर छापेमारी की गई है।

सूत्रों के अनुसार, मार्च 2025 में प्रकाशम जिले के एसपी और मामले के जांच अधिकारी ए.आर. दामोदर ने नायक को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। उस समय वे आंध्र प्रदेश में प्रतिनियुक्ति पर सीआईडी में डीआईजी के पद पर तैनात थे। अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि उनकी गिरफ्तारी की संभावना प्रबल मानी जा रही है। जानकारी यह भी है कि जमानत निरस्त होने के बाद एपी पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश करेगी और ट्रांजिट रिमांड पर अपने साथ ले जा सकती है।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

यह मामला वर्ष 2021 का है, जब तत्कालीन सांसद रघुराम कृष्ण राजू को वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की सरकार के दौरान गिरफ्तार किया गया था। राजू ने आरोप लगाया था कि हिरासत में उनके साथ मारपीट की गई, जानलेवा हमला हुआ और उनकी बाईपास सर्जरी की जानकारी होने के बावजूद सीने पर दबाव डाला गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें जरूरी दवाएं लेने से रोका गया।

जुलाई 2024 में दर्ज एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी तत्कालीन सीआईडी प्रमुख पी.वी. सुनील कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल किए गए। शिकायत में रबर बेल्ट और लाठियों के इस्तेमाल के आरोप भी दर्ज हैं। यह भी जांच के दायरे में है कि हैदराबाद से गुंटूर लाते समय कथित घटनाक्रम में सुनील नायक की क्या भूमिका रही।

सुनील नायक 2019 में प्रतिनियुक्ति पर आंध्र गए थे और 2023 में अपने मूल कैडर बिहार लौट आए, जहां फिलहाल वे डीआईजी (अग्निशमन सेवा) के पद पर तैनात हैं। हाल ही में एक अन्य नेता के. तुलसी बाबू की गिरफ्तारी और हाईकोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद जांच का दायरा और सख्त हो गया है।

अब जांच एजेंसियां मेडिकल रिकॉर्ड, हिरासत की वीडियोग्राफी, कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई कथित ‘कस्टडी कांड’ की परतें खोलेगी या फिर सियासी तनाव और बढ़ेगा—फिलहाल सबकी निगाहें जांच की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →
Share This Article