चिराग के पांव रुकते ही मांझी ने अड़ाई रुकावट, कुशवाहा की निगाहें खेल पर टिकी

Neha Nanhe

NEWS PR डेस्क : बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के आगामी चुनाव ने NDA गठबंधन के अंदर राजनीति की गर्मी बढ़ा दी है। जीतनराम मांझी ने नेतृत्व को पहले किए गए ‘एक राज्यसभा सीट’ के वादे की याद दिलाते हुए अपनी दावेदारी जोरशोर से पेश कर दी है। वहीं, उपेन्द्र कुशवाहा की नजरें भी अब दिल्ली में होने वाले अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जिससे गठबंधन में हल्की-हल्की खींचतान देखने को मिल रही है।

बिहार में पांच राज्यसभा सीटों के चुनाव ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। चिराग पासवान ने स्पष्ट कर दिया कि उनके परिवार से कोई भी उम्मीदवार राज्यसभा नहीं जाएगा। इसके बाद ही जीतन राम मांझी ने अपनी दावेदारी पेश कर चुनावी लड़ाई में टांग अड़ाई, जबकि उपेन्द्र कुशवाहा भी सक्रिय हो गए हैं।

विशेष बात यह है कि दोनों नेता सीधे खुद कुछ मैनेज करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। वे मीडिया के जरिए बयानबाजी कर बीजेपी नेतृत्व की ओर निगाहें गड़े हुए हैं, यह देखने के लिए कि कहीं उनकी झोली में कुछ सीट का लाभ तो नहीं आ जाता।

राज्यसभा की पांच सीटों में से बीजेपी और जेडीयू की दो-दो सीटें पक्की मानी जा रही हैं। चर्चा का केंद्र बिंदु है पांचवीं सीट, जिसे जीतने के लिए NDA को तीन और महागठबंधन को छह विधायकों की जरूरत है। इस मामले में AIMIM के पांच और BSP के एक विधायक निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने पटना में पत्रकारों से कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान उनसे दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट देने का वादा किया गया था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी मांग के लिए नहीं बल्कि गठबंधन के समय दिए गए आश्वासन की याद दिला रहे हैं।

मांझी ने कहा, “हमें कहा गया था कि दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट दी जाएगी। हमें विश्वास है कि नेतृत्व अपने वादे पर कायम रहेगा और अंतिम समय तक फैसला सुरक्षित रखेगा।”

मांझी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब चिराग पासवान ने अपनी मां को राज्यसभा भेजने की अटकलों को खारिज कर दिया है। इसी बीच उपेन्द्र कुशवाहा भी अपनी दावेदारी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब सबकी निगाहें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।

जहां चिराग पासवान ने फिलहाल अपने पारिवारिक दावेदारी को पीछे रखा है, वहीं उपेन्द्र कुशवाहा की उम्मीदें कायम हैं। सूत्रों के मुताबिक, NDA के अंदर राज्यसभा सीटों का फॉर्मूला तय किया जा रहा है, जिसमें 2 सीटें भाजपा, 2 सीटें जदयू और 1 सीट सहयोगी दल को देने का प्रस्ताव है।

इस एक सहयोगी सीट को लेकर HAM (जीतनराम मांझी), LJP (रामविलास पासवान) और RLM के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है।

बिहार में राज्यसभा की एक अतिरिक्त सीट जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत है। वर्तमान में NDA के पास 202 विधायक हैं, जो चार सीटें आसानी से जीतने के लिए पर्याप्त हैं। लेकिन पांचवीं सीट के लिए उन्हें 205 वोटों की आवश्यकता होगी।

वहीं, महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं। अगर उन्हें AIMIM के 5 और BSP के 1 विधायक का समर्थन मिल जाता है, तो तेजस्वी यादव भी एक सीट जीत सकते हैं।

फिलहाल, जिन सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें जदयू के रामनाथ ठाकुर और हरिवंश नारायण सिंह, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के उपेन्द्र कुशवाहा, राजद के प्रेमचंद्र गुप्ता, और अमरेंद्रधारी सिंह शामिल हैं।

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