बिहार के 72 शिक्षकों को मिलेगा राजकीय शिक्षक पुरस्कार 2025

Jyoti Sinha
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बिहार सरकार ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 72 शिक्षकों को राजकीय शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित करने की घोषणा की है। यह सम्मान उन शिक्षकों को दिया जाएगा जिन्होंने विद्यार्थियों की शिक्षा के साथ-साथ समाज में शिक्षा की गुणवत्ता को ऊँचाई तक पहुँचाने में विशेष भूमिका निभाई है।पुरस्कार पाने वाले शिक्षकचयनित शिक्षकों में 29 महिला और 43 पुरुष शामिल हैं। इनमें प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और उर्दू विद्यालयों के शिक्षक-प्रधानाध्यापक सम्मिलित हैं।

शिक्षा विभाग की निदेशक (प्राथमिक) साहिला ने बुधवार को चयनित शिक्षकों की सूची जारी की।शिक्षक दिवस पर राज्य स्तरीय समारोहसम्मान समारोह का आयोजन 5 सितंबर 2025 को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में होगा। इस अवसर पर प्रत्येक शिक्षक को ₹30,000 की राशि, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। शिक्षक दिवस हर वर्ष डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य में पूरे देश में मनाया जाता है।

कुछ प्रमुख चयनित नामसुनीता कुमारी, प्रभारी प्रधान शिक्षिका – उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बराठी, कैमूरउमेश कुमार प्रसाद सिंह, विशिष्ट शिक्षक – आरपीसीजे उच्च विद्यालय, वैशालीमुकेश कुमार मृदुल, विद्यालय अध्यापक – उच्च माध्यमिक विद्यालय, समस्तीपुरज्योति कुमारी, प्रधान शिक्षिका – प्राथमिक विद्यालय, पूर्णियांधीरज सिंह, विज्ञान शिक्षक – मध्य विद्यालय, अररियाडॉ. अशोक कुमार, प्रधानाध्यापक – राजकीय मध्य विद्यालय, औरंगाबादशालिनी कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका – मध्य विद्यालय, भागलपुरअनुराधा कुमारी, प्रधानाध्यापिका – उच्च माध्यमिक विद्यालय, खगड़ियाअलक राय, विशिष्ट शिक्षिका – एमआरएस उच्च माध्यमिक विद्यालय, मुजफ्फरपुर

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ये नाम शिक्षा विभाग द्वारा जारी 72 शिक्षकों की सूची का हिस्सा हैं।महिला शिक्षकों की बढ़ती भूमिकाइस वर्ष चयनित शिक्षकों में 29 महिला शिक्षिकाएं शामिल हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है। यह बदलाव शिक्षा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती सक्रियता और नेतृत्व की ओर संकेत करता है।पुरस्कार का महत्वविशेषज्ञों का कहना है कि राजकीय शिक्षक पुरस्कार सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव का संदेश है। संसाधनों की कमी के बावजूद उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को पहचान देकर न केवल उनका मनोबल बढ़ता है, बल्कि अन्य शिक्षकों को भी प्रेरणा मिलती है।

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