NEWS PR डेस्क: बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए हुए चुनाव में सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। चूंकि 10 सीटों के लिए केवल 10 उम्मीदवार ही मैदान में थे, इसलिए मतदान की नौबत नहीं आई। 11 जून को कई निर्वाचित उम्मीदवारों ने बिहार विधानमंडल पहुंचकर अपना जीत का प्रमाण पत्र भी प्राप्त किया।

इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सभी उम्मीदवारों की जीत पहले से लगभग तय मानी जा रही थी। विधानसभा में पर्याप्त संख्याबल होने के कारण एनडीए को अपने उम्मीदवारों के चुनाव में किसी प्रकार की चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चारों उम्मीदवार—संजय मयूख, पवन सिंह, शीला पंडित और अनिल ठाकुर—निर्विरोध विधान पार्षद निर्वाचित घोषित किए गए। पार्टी ने इसे संगठन और गठबंधन की मजबूती का संकेत बताया है।

वहीं जनता दल यूनाइटेड (JDU) के चारों उम्मीदवार—निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी और ललन प्रसाद—भी निर्विरोध चुनाव जीतने में सफल रहे। इनमें ललन प्रसाद पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा खाली की गई सीट से उम्मीदवार बनाए गए थे। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से अशरफ अंसारी को उम्मीदवार बनाया गया था। वे भी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं और पहली बार विधान परिषद के सदस्य के रूप में अपने संसदीय जीवन की शुरुआत करेंगे।
दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार सुनील कुमार सिंह भी निर्विरोध विधान पार्षद चुने गए। सुनील सिंह लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं और उनकी जीत पहले से तय मानी जा रही थी। सभी निर्वाचित उम्मीदवारों ने जीत का प्रमाण पत्र लेना शुरू कर दिया है। निर्विरोध चुनाव के चलते इस बार विधान परिषद चुनाव बिना किसी राजनीतिक मुकाबले के संपन्न हो गया।
