बिहार पुलिस का रिपोर्ट कार्ड जारी, 112 से लेकर CCTV और ड्रोन तक पर सरकार का फोकस

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क: पटना: बिहार में कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग को लेकर राज्य सरकार ने अपना रिपोर्ट कार्ड सामने रखा है। रिपोर्ट में डायल-112, पुलिस आधुनिकीकरण, साइबर अपराध नियंत्रण, अभियोजन, जेल सुधार और पुलिस भर्ती से जुड़े कई आंकड़े पेश किए गए हैं। सरकार का दावा है कि आधुनिक तकनीक और संसाधनों के जरिए पुलिस व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है हालांकि, पुलिस बल में रिक्त पद और जमीनी स्तर पर त्वरित रिस्पॉन्स अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

डायल-112 से इमरजेंसी रिस्पॉन्स को मजबूती
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में डायल-112 सेवा के तहत 1,833 रिस्पॉन्स वाहन संचालित किए जा रहे हैं। इन वाहनों का औसत रिस्पॉन्स टाइम करीब 11 मिनट बताया गया है। पिछले चार वर्षों में डायल-112 सेवा के माध्यम से 62 लाख से अधिक लोगों तक सहायता पहुंचाने का दावा किया गया है। सरकार का कहना है कि इमरजेंसी की स्थिति में पुलिस की पहुंच को पहले की तुलना में तेज और व्यवस्थित बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है।
176 थानों में CCTV और डैशबोर्ड
पुलिस आधुनिकीकरण के तहत राज्य के 176 थानों में CCTV कैमरे और डैशबोर्ड लगाने की योजना है। इसके लिए 112.46 करोड़ रुपये की स्वीकृति दिए जाने की जानकारी दी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य थानों की गतिविधियों की निगरानी बढ़ाने और पुलिसिंग को तकनीक आधारित बनाना है।
ड्रोन से होगी हाईटेक पुलिसिंग
बिहार पुलिस को तकनीकी रूप से और मजबूत करने के लिए 50 ड्रोन की खरीद का प्रस्ताव भी आगे बढ़ाया गया है। इसके लिए 24.50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। ड्रोन के इस्तेमाल से कानून-व्यवस्था की निगरानी, भीड़ नियंत्रण, संवेदनशील इलाकों की मॉनिटरिंग और जरूरत के समय घटनास्थल की निगरानी में मदद मिलने की उम्मीद है।
मई 2026 तक 64,773 मामलों में सजा का दावा
अभियोजन के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए हैं। सरकारी दावे के मुताबिक मई 2026 तक 64,773 मामलों में सजा सुनाई गई है। इसका उद्देश्य गंभीर अपराधों में प्रभावी अभियोजन के जरिए दोषियों को सजा दिलाने और कानून के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत करना बताया जा रहा है।
जेल सुधार पर भी फोकस
बिहार में कुल 60 काराएं हैं। इनमें से 59 काराओं में बंदियों के लिए 159 टेलीफोन कियोस्क उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा बंदियों की शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार 27,136 निरक्षर बंदियों को साक्षर बनाने का प्रयास किया गया है। NIOS और IGNOU के माध्यम से बड़ी संख्या में बंदियों का शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन भी कराया गया है।
2.29 लाख से ज्यादा स्वीकृत पद, कार्यरत करीब 1.22 लाख कर्मी
पुलिस बल की स्थिति देखें तो यहां सबसे बड़ी चुनौती रिक्त पदों की है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार बिहार पुलिस में 2.29 लाख से अधिक पद स्वीकृत हैं, जबकि करीब 1.22 लाख पुलिसकर्मी ही कार्यरत हैं। यानी स्वीकृत पदों और मौजूदा पुलिस बल के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। पुलिस भर्ती को लेकर सरकार ने बताया कि 19,838 सिपाही पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहीं 4,361 चालक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। नई भर्तियों से पुलिस बल की कमी को कुछ हद तक दूर करने और थानों से लेकर फील्ड ड्यूटी तक मानव संसाधन मजबूत होने की उम्मीद है।
गृह रक्षा वाहिनी में भी पद खाली
गृह रक्षा वाहिनी यानी होमगार्ड की स्थिति में भी स्वीकृत और नामांकित पदों के बीच अंतर है। बिहार में 55,612 पद स्वीकृत हैं, जबकि 41,477 गृहरक्षक नामांकित हैं।
अब असली सवाल जमीनी असर का
सरकार की रिपोर्ट में डायल-112, CCTV, ड्रोन, आधुनिक उपकरण, अभियोजन और जेल सुधार से जुड़े कई सकारात्मक आंकड़े सामने आए हैं लेकिन इन योजनाओं की वास्तविक सफलता का आकलन इस बात से होगा कि इनका फायदा आम लोगों को जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से मिलता है।
पुलिस बल की कमी, रिस्पॉन्स टाइम, थानों पर काम का दबाव और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की उपलब्धता जैसे मुद्दे अब भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में आधुनिक संसाधनों और तकनीक के साथ पर्याप्त पुलिस बल की उपलब्धता बिहार में प्रभावी और भरोसेमंद पुलिसिंग की अगली बड़ी चुनौती होगी।

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