मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: महिलाओं को दो लाख तक की आर्थिक सहायता पाने के लिए अब चुकाने होंगे हजारों रुपए

Neha Nanhe

NEWS PR डेस्क : मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाएं रोजगार या व्यवसाय शुरू करने के लिए 2 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं। इसके लिए महिलाओं का अपना योगदान देना अनिवार्य है। जानें इस योजना की किस्तें, नियम और पूरी आवेदन प्रक्रिया।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाएं अपना रोजगार या छोटा व्यवसाय शुरू करने और उसे विकसित करने के लिए राज्य सरकार से आर्थिक मदद प्राप्त कर सकती हैं। इस योजना के अंतर्गत लाभार्थी महिलाओं को अधिकतम ₹2 लाख तक की सहायता दी जाएगी, लेकिन इसके लिए महिलाओं का अपने हिस्से का योगदान देना अनिवार्य है। इस संबंध में ग्रामीण विकास विभाग ने सभी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

अंशदान करने की वजह

सरकार का मकसद है कि महिलाएं अपने व्यवसाय को गंभीरता से विकसित करें और आर्थिक रूप से सशक्त बनें। इसलिए इस योजना में लाभार्थी महिलाओं को अपने हिस्से की कुछ राशि निवेश करना अनिवार्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि जब महिलाएं अपनी पूंजी लगाती हैं, तो वे अपने व्यवसाय को और अधिक जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ संचालित करती हैं।

पैसे चार चरणों में वितरित होंगे

इस योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को सीधे ₹2 लाख की राशि एक साथ नहीं मिलेगी। इसके बजाय, सरकार यह राशि चार अलग-अलग किस्तों में वितरित करेगी। हर किस्त के साथ महिलाओं का अपना अंशदान देना भी आवश्यक होगा।

किस्तों और अंशदान की पूरी जानकारी

पहली किस्त
योजना के पहले चरण में महिलाओं को ₹10,000 की राशि दी गई है। इस राशि के लिए महिलाओं को कोई अंशदान नहीं देना पड़ा। इसका मकसद लाभार्थी महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए शुरुआती आर्थिक मदद देना है।

दूसरी किस्त
दूसरे चरण में महिलाओं को ₹20,000 मिलेंगे। इस चरण में लाभार्थियों को अपने व्यवसाय की प्रगति दिखानी होगी और कुछ मामलों में उन्हें अपने हिस्से से भी छोटे स्तर पर निवेश करना होगा।

अतिरिक्त सहायता और अंशदान
योजना में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए ₹5,000-₹5,000 की अतिरिक्त सहायता का भी प्रावधान है। इसके लिए महिलाओं को व्यवसाय की स्थिति के अनुसार निर्धारित अंशदान देना होगा।

तीसरी किस्त
तीसरे चरण में लाभार्थी महिलाओं को ₹40,000 की राशि दी जाएगी। इस किस्त के लिए महिलाओं को ₹10,000 का अंशदान करना होगा, यानी सरकार और महिलाएं दोनों मिलकर व्यवसाय में निवेश करेंगी।

चौथी किस्त
चौथे और अंतिम चरण में महिलाओं को ₹80,000 की मदद दी जाएगी। इसके लिए उन्हें ₹20,000 का अंशदान करना होगा। इस तरह, योजना के दौरान महिलाओं को कुल मिलाकर ₹35,000 निवेश करना अनिवार्य होगा।

अंतिम चरण में अतिरिक्त राहत
योजना के अंतिम हिस्से में सरकार द्वारा ₹60,000 की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी, जिसमें महिलाओं को कोई अंशदान नहीं करना होगा। इसका उद्देश्य महिलाओं को उनके व्यवसाय को स्थायी रूप से स्थापित करने में मदद देना है।

एकमुश्त राशि का विकल्प
अगर कोई महिला एक ही बार में ₹2 लाख की राशि लेना चाहती है, तो उसके लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पहले ग्राम स्तर पर व्यवसाय का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव जिला स्तरीय समिति को भेजा जाएगा और जिला समिति की मंजूरी मिलने पर राज्य स्तरीय समिति अंतिम निर्णय लेगी। केवल समिति की अनुशंसा के बाद ही एकमुश्त राशि प्रदान की जा सकती है।

अगली किस्त व्यवसाय की जांच के बाद
ग्रामीण विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगली किस्त तभी जारी होगी जब महिलाओं द्वारा शुरू किया गया व्यवसाय आकलन के बाद संतोषजनक पाया जाएगा। यदि महिलाएं समूह बनाकर व्यवसाय शुरू करती हैं, तो ग्राम संगठन द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा और उसी आधार पर सहायता दी जाएगी।

अन्य योजनाओं से अलग नियम
बिहार लघु उद्यमी योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं को इस योजना में अतिरिक्त राशि नहीं मिलेगी। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक नई महिलाओं को योजना का लाभ पहुंचाना है।

महिलाओं के लिए अवसर
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। अंशदान की शर्त के बावजूद यह योजना महिलाओं को व्यवसाय में भागीदारी और जिम्मेदारी दोनों सिखाती है। खासकर ग्रामीण महिलाओं के लिए यह रोजगार और आय बढ़ाने का बेहतरीन अवसर साबित हो रही है।

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