मौसम पूर्वानुमान में बड़ी छलांग: सरकार ने मजबूत किया अवलोकन नेटवर्क, एआई आधारित मॉडल लागू

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: सरकार ने देश में मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं को और अधिक सटीक एवं प्रभावी बनाने के लिए व्यापक संस्थागत तंत्र विकसित किया है। यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में दी। उन्होंने बताया कि नई तकनीकों, उन्नत डेटा एकीकरण और उच्च क्षमता वाली कंप्यूटेशनल प्रणालियों के माध्यम से गंभीर मौसम घटनाओं की सटीक चेतावनी जारी करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

आईएमडी और सहयोगी संस्थानों की समन्वित पहल

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन अन्य प्रमुख संस्थानों—भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे तथा राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र, नोएडा—के साथ मिलकर उन्नत मॉडलिंग और डेटा आत्मसात प्रणाली पर कार्य कर रहा है। मंत्रालय ने “मिशन मौसम” की शुरुआत भी की है, जिसका उद्देश्य भारत को “मौसम के लिए तैयार और जलवायु-स्मार्ट” राष्ट्र बनाना है।

‘मिथुना-एफएस’ से बढ़ी सटीकता

एनसीएमआरडब्ल्यूएफ द्वारा विकसित ‘मिथुना-एफएस’ नई पीढ़ी की वैश्विक युग्मित पूर्वानुमान प्रणाली है, जो 12 किमी वैश्विक रिज़ॉल्यूशन पर काम करती है। इसमें मानसून और चक्रवात के लिए 4 किमी क्षेत्रीय मॉडल तथा दिल्ली में कोहरा और वायु गुणवत्ता के लिए 330 मीटर का अति-स्थानीय मॉडल शामिल है। एआई/एमएल आधारित पोस्ट-प्रोसेसिंग के साथ यह प्रणाली जिला स्तर पर लू, भारी वर्षा और गरज-चमक जैसी चरम घटनाओं की संभावना का बेहतर आकलन करती है। पिछले दशक में गंभीर मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में 30-40 प्रतिशत तक सुधार दर्ज किया गया है।

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‘मौसमग्राम’ और नागरिक-केंद्रित सेवाएं

आईएमडी ने ‘मौसमग्राम’ नामक डिजिटल मंच शुरू किया है, जो गांव स्तर तक स्थान-विशिष्ट पूर्वानुमान उपलब्ध कराता है। यह मंच 36 घंटे का प्रति घंटा पूर्वानुमान, पांच दिन तक तीन-तीन घंटे का और दस दिन तक छह-छह घंटे का पूर्वानुमान प्रदान करता है। नागरिक पिनकोड या ग्राम पंचायत के आधार पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

एआई आधारित नई तकनीकें

आईएमडी ने चक्रवात की तीव्रता का अनुमान लगाने के लिए एआई आधारित एडवांस्ड ड्वोरक तकनीक (एआईडीटी) विकसित की है। दिल्ली-एनसीआर के लिए 300 मीटर रिज़ॉल्यूशन वाला डीप लर्निंग मॉडल ‘मेटियोजेन’ तैयार किया गया है। साथ ही मानसून के दौरान दैनिक वर्षा पूर्वानुमान के लिए मशीन लर्निंग आधारित मॉडल भी विकसित किया गया है।

किसानों को रीयल-टाइम मौसम जानकारी

सरकार किसानों तक मौसम आधारित फसल परामर्श सेवा पहुंचा रही है। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा (जीकेएमएस) के तहत 127 कृषि-जलवायु क्षेत्रों को कवर करने वाली 130 कृषि मौसम इकाइयां कार्यरत हैं। ये इकाइयां सप्ताह में दो बार फसल प्रबंधन, बुवाई, सिंचाई और कटाई संबंधी सलाह जारी करती हैं। लगभग 55 लाख किसान एसएमएस, मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया और राज्य सरकारों के आईटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से मौसम अलर्ट और कृषि सलाह प्राप्त कर रहे हैं।

पंचायत स्तर तक पूर्वानुमान

आईएमडी ने पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से पंचायत स्तर पर मौसम पूर्वानुमान शुरू किए हैं, जो ई-ग्रामस्वराज, मेरी पंचायत ऐप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आपदा तैयारी और फसल प्रबंधन में मदद मिल रही है। सरकार का दावा है कि उन्नत तकनीक, एआई आधारित मॉडलिंग और डिजिटल प्रसार प्रणाली के जरिए देश में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली पहले से कहीं अधिक मजबूत और सटीक हो गई है, जिससे आपदा जोखिम कम करने और जन-जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मदद मिल रही है।

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