NEWS PR डेस्क: बिहार में लंबे समय से चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण कार्य को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राज्य में चल रहे भूमि सर्वेक्षण को हर हाल में दो वर्षों के भीतर पूरा किया जाए। इस संबंध में बुधवार (04 फरवरी, 2026) को विभागीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की गई।
2011 में हुई थी घोषणा, अब तेजी से होगा क्रियान्वयन
उपमुख्यमंत्री ने बैठक में याद दिलाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2011 में ही बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण की घोषणा की थी और इसे दो साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था। उन्होंने कहा कि अब इस लक्ष्य को धरातल पर उतारने के लिए सभी जिलों से समय-सीमा आधारित विस्तृत कार्य रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत की जाए। मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गलती या देरी पर तय होगी जवाबदेही
विजय सिन्हा ने कहा कि जहां भी त्रुटि या अनावश्यक विलंब पाया जाएगा, वहां संबंधित अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि भूमि सर्वे केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भूमि सुधार का मजबूत आधार है। गलत रिपोर्टिंग, मनमानी या अनियमितता की स्थिति में कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आम लोगों से भी मांगी गई सहभागिता
उपमुख्यमंत्री ने आम नागरिकों से अपील की कि यदि उन्हें भूमि सर्वेक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता दिखाई दे, तो उसकी जानकारी लिखित रूप में विभाग को दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
पहले चरण में देरी की वजह आई सामने
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने बैठक में बताया कि पहले चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों में विशेष सर्वेक्षण कर्मियों की समय पर नियुक्ति नहीं हो पाने के कारण दिसंबर 2021 तक सर्वे का कार्य पूरा नहीं किया जा सका। इसके बाद शेष अंचलों और 18 जिलों के सभी अंचलों में सितंबर 2024 से सर्वे कार्य दोबारा शुरू किया गया।
सर्वे कार्य की अब तक की प्रगति
कार्य प्रगति की जानकारी देते हुए बताया गया कि पहले चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों के 5,657 राजस्व गांवों में ऑर्थोफोटोग्राफ, ग्राम स्तरीय उद्घोषणा और ग्राम सभा का कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। वहीं, दूसरे चरण में 36 जिलों के 444 अंचलों के 37,419 राजस्व गांवों में हवाई सर्वेक्षण, ऑर्थोफोटोग्राफ, ग्राम स्तरीय उद्घोषणा और ग्राम सभा का कार्य पूरा किया जा चुका है। इस दौरान रैयतों से 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं।
भूमि सुधार को मिलेगी नई दिशा
सरकार का मानना है कि भूमि सर्वेक्षण के पूरा होने से भूमि विवादों में कमी आएगी और राजस्व व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तय समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ काम पूरा किया जाए, ताकि इसका सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंच सके।