105 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी अर्जुन दास की मौत से नालंदा जिला सहित मुंगेर जिला में छाई उदासी

Patna Desk
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मुंगेर के धरहरा प्रखंड के मोहनपुर में अपनी बेटी के यहां ली अंतिम सांस । काफी दिनों से चल रहे थे बीमार । मूल रूप से नालंदा जिला के मथुरिया मोहल्ले के रहने वाले थे स्वतंत्रता सेनानी अर्जुन दास।

105 वर्षीय अर्जुन दास ने अपनी अंतिम सांस मुंगेर जिला अंतर्गत धरहरा प्रखंड क्षेत्र के मोहनपुर स्थिति अपनी बेटी के घर में ली । उनकी मौत की सूचना फैलते ही नालंदा जिला सहित मुंगेर में भी शोक का लहर फैल गया । जानकारी के अनुसार गांधीवादी और गांधी के विचारों से लबरेज जीवन के सौ साल के लंबे सफर में न जाने कितने परिवर्तन को उन्होंने देखा । शरीर पे वही खादी का कुर्ता और धोती वो पहने नजर आते थे न कोई अभिमान न कोई दिखावा। आज भी समाज के लिए अपना सब कुछ समर्पित करने कि इच्छा रखने वाले अर्जुन दास काफी ही मिलनसार स्वभाव के थे। 105 साल होने से वे शरीर से भले ही कमजोर हो गए थे । वे देशभक्ति के जज्बा से लबरेज रहते थे।वे स्वतंत्रता सेनानी शीलभद्र के नेतृत्व में भारत के कई स्वतंत्रता आंदोलन में मुख्य भूमिका निभा चुके थे । उन्हें भारत सरकार और बिहार सरकार की और से स्वतंत्रता सेनानी पेंशन दिया जाता था । हालांकि सरकार के द्वारा उन्हें जिस मुकाम का सम्मान मिलना चाहिए वो उन्हें नहीं मिल पाया ।

सन 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाले अर्जुन दास बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के कई स्थानों में अंग्रेजों के विरुद्ध अपनी जाबांजी दिखा चुके थे। कभी गरम दल के सेनानी रहे इस स्वतंत्रता सेनानी ने बख्तियारपुर थाने पर भी हमला किया था। और वे भी जेल जा चुके थे । पर गांधी जी के विचारों ने उन पे गहरा प्रभाव डाला और उन्हें बदल डाला। जानकारी के अनुसार बख्तियारपुर में जब गांधी जी आए थे तो उन्होंने दर्शन किया था। और जब आज वे इस दुनिया में नहीं रहे । पारिवारिक स्थिति की बात कहे तो वे 5 मार्च 1920 को जन्मे थे और उनकी पत्नी का नाम स्वर्गीय सोना देवी है।उन्हें तीन बेटा और पांच बेटी है और पिछले दो साल से वे अपनी बेटी के यहां मुंगेर में रह रहे थे ।

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