वेदांता समूह पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, फेमा उल्लंघन मामले में कई ठिकानों पर छापेमारी

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: खनन और धातु क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वेदांता समूह एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में की जा रही है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

फेमा कानून का उद्देश्य देश में विदेशी मुद्रा से जुड़े लेन-देन को नियंत्रित और पारदर्शी बनाए रखना है। ईडी तब कार्रवाई करती है जब उसे किसी व्यक्ति या कंपनी द्वारा विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन की आशंका होती है। ऐसे मामलों में अवैध विदेशी निवेश, हवाला लेन-देन, विदेश में संपत्ति खरीदने के लिए नियमों की अनदेखी या विदेश में धन हस्तांतरण जैसे आरोप शामिल हो सकते हैं।

वेदांता समूह भारत के खनन, धातु और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में गिना जाता है। कंपनी देश की सबसे बड़ी प्राथमिक एल्युमिनियम उत्पादकों में शामिल है और भारत की जिंक जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करती है। इसके अलावा, समूह की तेल एवं गैस कारोबार में भी महत्वपूर्ण मौजूदगी है। हाल ही में कंपनी ने भारत में अगले कुछ वर्षों के दौरान करीब 2 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया था।

यह पहला मौका नहीं है जब वेदांता समूह विदेशी मुद्रा नियमों से जुड़े मामलों में जांच के घेरे में आया हो। वर्ष 2004 में ईडी ने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज और उसके तीन प्रमोटर निदेशकों को तत्कालीन फेरा (FERA) और फेमा नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया था। उस समय कंपनी और संबंधित निदेशकों पर आर्थिक दंड भी लगाया गया था।

फिलहाल, ईडी की मौजूदा कार्रवाई को लेकर उद्योग जगत और निवेशकों की नजरें कंपनी के आधिकारिक जवाब तथा जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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