गर्मी का असर: भागलपुर में फिर लौटी मिट्टी के घड़े की ठंडक, बाजारों में बढ़ी रौनक

Desi mantra for relief from heat: Growing demand for pitchers and jugs

Neha Nanhe
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जैसे-जैसे भागलपुर में गर्मी अपना तेवर दिखा रही है, वैसे-वैसे शहर के बाजारों में एक पुरानी परंपरा फिर से जीवंत होती नजर आ रही है। भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए लोग अब आधुनिक साधनों से हटकर प्राकृतिक और पारंपरिक विकल्पों की ओर लौट रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है—मिट्टी के घड़े और सुराही की बढ़ती मांग।
मिट्टी के बर्तनों की दुकानों पर खासा जमावड़ा
शहर के घंटाघर इलाके में इन दिनों मिट्टी के बर्तनों की दुकानों पर खासा जमावड़ा देखने को मिल रहा है। सुबह से लेकर देर शाम तक ग्राहक ठंडे पानी के लिए घड़े और सुराही खरीदते नजर आ रहे हैं। दुकानदार दीपक कुमार बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों में बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है, खासकर शाम के समय जब लोग गर्मी से राहत पाने के लिए बाजार का रुख करते हैं।
यह सेहत के लिए भी फायदेमंद
दीपक कुमार के मुताबिक, मिट्टी के घड़े का पानी न सिर्फ प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है, बल्कि यह सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। इसमें पानी का तापमान संतुलित रहता है, जो शरीर को धीरे-धीरे ठंडक पहुंचाता है और पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। पहले जहां लोग फ्रिज के ठंडे पानी पर ज्यादा निर्भर हो गए थे, अब धीरे-धीरे पारंपरिक तरीकों की वापसी हो रही है। कम लागत, बिजली की बचत और प्राकृतिक ठंडक जैसे कारणों से मिट्टी के बर्तन फिर से लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
कारीगरों के लिए यह मौसम उम्मीद लेकर आया
इस बढ़ती मांग का सीधा फायदा स्थानीय कुम्हारों को भी मिल रहा है। लंबे समय से संघर्ष कर रहे कारीगरों के लिए यह मौसम उम्मीद लेकर आया है। घड़े और सुराही की बिक्री बढ़ने से उनके रोजगार को नई रफ्तार मिली है। गर्मी के इस मौसम में मिट्टी के बर्तनों की बढ़ती लोकप्रियता न सिर्फ राहत का साधन बन रही है, बल्कि यह हमारी पारंपरिक संस्कृति के पुनर्जागरण का भी संकेत दे रही है।
भागलपुर से शयामानंद सिंह की रिपोर्ट

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