बिहार में बाढ़ का संकट गहराया, 8 नदियां खतरे के निशान से ऊपर; 36 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क: बिहार में लगातार बढ़ रहे नदी के जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर कर दिया है। गंगा सहित राज्य की आठ प्रमुख नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रदेश के 14 जिलों के दर्जनों प्रखंड और सैकड़ों पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 36 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।


सुल्तानगंज में गंगा ने तोड़ा पुराना रिकॉर्ड
भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा नदी ने पिछले पांच वर्षों का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है। मंगलवार को यहां नदी का जलस्तर 36.81 मीटर तक पहुंच गया। इससे पहले वर्ष 2021 में गंगा का जलस्तर 36.75 मीटर दर्ज किया गया था। पटना में भी पुनपुन नदी का तेवर तल्ख बना हुआ है।
श्रीपालपुर में पिछले 24 घंटे के दौरान जलस्तर में करीब 9 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। नदी यहां खतरे के निशान से लगभग 2.95 मीटर ऊपर बह रही है। दरधा और महतमाइन नदियों के बढ़े जलस्तर ने भी स्थानीय इलाकों में चिंता बढ़ा दी है।
कई नदियों का बढ़ा दबाव
गंगा के साथ-साथ कोसी, गंडक और घाघरा नदियां भी अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर हैं। मुजफ्फरपुर के बेनीबाद में बागमती का जलस्तर लाल निशान से ऊपर पहुंच चुका है। वहीं गोपालगंज के डुमरिया में गंडक नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सोन नदी में पानी कम होने लगा है, लेकिन कई स्थानों पर इसका जलस्तर अब भी खतरे के निशान के पार है। सारण में माही नदी पर बना जमींदारी बांध टूटने के बाद बाढ़ का संकट और बढ़ गया है।
भोजपुर में डूबने से चार लोगों की मौत
बाढ़ के पानी ने कई इलाकों में जान-माल को भी नुकसान पहुंचाया है। पश्चिम चंपारण के बगहा इलाके में गंडक नदी का कटाव लगातार जारी है। मधुबनी प्रखंड के रेवहिया क्षेत्र में नदी का कटाव लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। बताया जा रहा है कि इस साल गंडक नदी अब तक करीब 70 घरों और एक प्राथमिक विद्यालय को नुकसान पहुंचा चुकी है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर कृषि भूमि और फसल भी नदी में समा चुकी है।
सारण में 2 लाख से अधिक लोग प्रभावित
सारण जिले में बाढ़ की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है। जिले के सात प्रखंडों के करीब 109 गांव बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। यहां लगभग 2.12 लाख लोगों के बाढ़ की चपेट में आने की बात सामने आई है।
राहत शिविरों में जरूरी सुविधाओं की कमी
सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और राहत शिविरों में भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। राहत शिविरों में आम तौर पर दो वक्त दाल, चावल और सब्जी उपलब्ध कराई जा रही है।
हालांकि, बाढ़ प्रभावित परिवारों की दूसरी जरूरी जरूरतें अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। कई राहत शिविरों में बच्चों के लिए दूध, महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड और पर्याप्त चेंजिंग स्पेस जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। पशुपालकों के सामने मवेशियों के चारे का संकट भी बना हुआ है। कुछ इलाकों में राहत रसोई की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों का आरोप है कि सरकारी दावों और जमीन पर उपलब्ध सुविधाओं के बीच काफी अंतर है।
16 जिलों में बारिश का अलर्ट
बाढ़ के बीच मौसम विभाग ने राज्य के 16 जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें पांच जिलों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है, जबकि पटना समेत 11 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए आने वाले दिनों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। प्रशासन की निगाह नदी के जलस्तर, तटबंधों और कटाव प्रभावित इलाकों पर बनी हुई है।

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