NEWS PR डेस्क:पूर्वी चंपारण में एसडीएम पद पर पोस्टिंग दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपये की कथित ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में साइबर थाना और बिहार एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में मुख्य आरोपी राजन जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी को पटना आने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस से हिरासत में लेकर मोतिहारी लाया गया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी के मोबाइल फोन से कई अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनकी जांच जारी है। शुरुआती जांच में मामला किसी बड़े ट्रांसफर-पोस्टिंग नेटवर्क से जुड़ा होने की आशंका भी जताई जा रही है।
SDM पोस्टिंग दिलाने का दिया था झांसा
पुलिस जांच के मुताबिक, यह मामला बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) अधिकारियों के हालिया तबादलों से जुड़ा है। सीवान जिले के मैरवा निवासी राजन जायसवाल ने मोतिहारी के तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी अरुण कुमार को भरोसा दिलाया कि वह अपने कथित प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें मोतिहारी सदर एसडीएम के पद पर नियुक्त करा सकता है। इसके बदले आरोपी ने 25 लाख रुपये की मांग की थी।
पोस्टिंग के बाद शुरू की पैसों की मांग
बताया गया कि 12 जुलाई को जारी तबादला अधिसूचना में अरुण कुमार की पोस्टिंग मोतिहारी सदर एसडीओ के पद पर हो गई। इसके बाद राजन जायसवाल ने दावा किया कि यह नियुक्ति उसकी पैरवी का नतीजा है। आरोप है कि इसके बाद उसने व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए लगातार 25 लाख रुपये की मांग शुरू कर दी। इतना ही नहीं, उसने कथित तौर पर यह धमकी भी दी कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पोस्टिंग रद्द या स्थगित करवा देगा। आरोपी ने कथित तौर पर कुछ सरकारी फाइलों के स्क्रीनशॉट भी अधिकारी को भेजे।
शिकायत के बाद साइबर पुलिस हुई सक्रिय
लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर 19 जुलाई को एसडीओ अरुण कुमार ने मोतिहारी साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद साइबर डीएसपी प्रतीश कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने तकनीकी जांच और कॉल ट्रेसिंग शुरू की। जांच के दौरान आरोपी की लाइव लोकेशन ट्रैक की गई। जब पता चला कि वह वंदे भारत एक्सप्रेस से पटना की ओर जा रहा है, तो बिहार एसटीएफ को सूचना दी गई। एसटीएफ ने मोकामा के पास ट्रेन में कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार किया और उसे मोतिहारी पुलिस के हवाले कर दिया।
मोबाइल से मिले IAS-IPS अधिकारियों के नंबर
प्रारंभिक जांच में आरोपी के मोबाइल फोन से 10 से अधिक IAS और IPS अधिकारियों के निजी मोबाइल नंबर मिले हैं। इसके अलावा व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और कई अन्य डिजिटल दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी वास्तव में किसी ट्रांसफर-पोस्टिंग सिंडिकेट का हिस्सा था या फिर बड़े अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों से ठगी करता था।
जांच के दायरे में बड़ा नेटवर्क
साइबर डीएसपी प्रतीश कुमार ने बताया कि जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी ने इसी तरह कितने लोगों को पोस्टिंग का झांसा देकर ठगी का प्रयास किया और क्या इस पूरे मामले में कोई संगठित गिरोह भी शामिल है। मोतिहारी से संतोष राउत की रिपोर्ट ।
