1 नवंबर से बदले गैस सिलेंडर के दाम, बिहार चुनावी माहौल में उपभोक्ताओं को मिली राहत — कॉमर्शियल सिलेंडर सस्ता, घरेलू रेट स्थिर

Jyoti Sinha
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बिहार विधानसभा चुनावी सरगर्मी के बीच गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर आई है। हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर के नए रेट जारी किए जाते हैं, और 1 नवंबर से देशभर में ताज़ा कीमतें लागू हो गई हैं। इस बार तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटाए हैं, जबकि घरेलू गैस के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ सस्ता
तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलो वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 5 से 6.50 रुपये तक की कटौती की है।

  • दिल्ली में अब सिलेंडर ₹1590.50 का मिलेगा (पहले ₹1595.50)।
  • कोलकाता में कीमत ₹1700.50 से घटकर ₹1694 हो गई।
  • मुंबई में रेट ₹1547 से घटकर ₹1542 हो गया।
  • चेन्नई में सिलेंडर ₹1754.50 की जगह अब ₹1750 में मिलेगा।

यानी उपभोक्ताओं को थोड़ी लेकिन ठोस राहत मिली है। पिछले एक साल में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम करीब ₹200 तक घट चुके हैं। नवंबर 2024 में दिल्ली में इसकी कीमत ₹1802 थी, जो अब घटकर ₹1590.50 रह गई है।

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घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट में कोई बदलाव नहीं
14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम इस महीने स्थिर रखे गए हैं।
इंडियन ऑयल के मुताबिक, प्रमुख शहरों में मौजूदा रेट इस प्रकार हैं:

  • दिल्ली – ₹853
  • मुंबई – ₹852.50
  • लखनऊ – ₹890.50
  • पटना – (स्थानीय कर के अनुसार थोड़ी अधिक)

क्यों अलग-अलग शहरों में अलग हैं एलपीजी के दाम?
देश में एलपीजी सिलेंडर की कीमतें राज्य-दर-राज्य अलग होती हैं। इसके पीछे कई कारण हैं:

  • हर राज्य में वैट (Value Added Tax) की दर अलग होती है।
  • कुछ राज्य एलपीजी पर अतिरिक्त उपकर (surcharge) भी लगाते हैं।
  • परिवहन लागत – रिफाइनरी या डिपो से दूर इलाकों तक सिलेंडर पहुंचाने में अधिक खर्च आता है।
  • भौगोलिक स्थिति – पहाड़ी या ग्रामीण क्षेत्रों में डिलीवरी लागत ज्यादा होती है।
  • डीलर मार्जिन, भंडारण खर्च और स्थानीय नियमों के कारण भी दामों में अंतर देखा जाता है।

बड़े शहरों में जहां वितरण व्यवस्था बेहतर और सुगम है, वहां लागत कम होती है। वहीं, छोटे कस्बों और दुर्गम इलाकों में सिलेंडर पहुंचाने की लागत बढ़ने से कीमतें भी स्वाभाविक रूप से ज्यादा होती हैं।

इस तरह, नवंबर की शुरुआत में तेल कंपनियों का यह कदम उपभोक्ताओं को थोड़ी आर्थिक राहत देता है, खासकर तब जब बिहार में चुनावी माहौल के बीच महंगाई एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

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