अप्रैल में मछली पालन को लेकर सरकार की खास सलाह, ग्रास कार्प ब्रिडिंग शुरू करने के निर्देश

जारी निर्देशों के अनुसार, मत्स्य पालकों को नए तालाब निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान का चयन करने के साथ-साथ पुराने तालाबों की मरम्मत एवं सुधार कार्य शीघ्र शुरू करना चाहिए, ताकि उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके।

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 08 अप्रैल। बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत मत्स्य निदेशालय ने राज्य में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अप्रैल माह हेतु विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने मत्स्य पालकों से वैज्ञानिक तरीके अपनाने और समयबद्ध तैयारी करने की अपील की है।

जारी निर्देशों के अनुसार, मत्स्य पालकों को नए तालाब निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान का चयन करने के साथ-साथ पुराने तालाबों की मरम्मत एवं सुधार कार्य शीघ्र शुरू करना चाहिए, ताकि उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके।

ग्रास कार्प ब्रिडिंग पर जोर

विभाग ने विशेष रूप से निर्देश दिया है कि अप्रैल माह में ग्रास कार्प मछली का ब्रिडिंग कार्य हैचरी में शुरू कर दिया जाए। बदलते मौसम और आगामी बारिश को देखते हुए तालाबों में ऑक्सीजन की कमी से बचाव के लिए ऐयरेंशन या जल पुनर्चक्रण की व्यवस्था करना जरूरी बताया गया है।

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बीमारियों से बचाव के उपाय

मछलियों को बीमारियों से बचाने के लिए पोटाशियम परमेग्नेट का उपयोग निर्धारित मात्रा (400 ग्राम प्रति एकड़ प्रति मीटर जल गहराई) में करने की सलाह दी गई है। वहीं, आर्गुलस एवं अन्य जलीय कीटों के संक्रमण की स्थिति में विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार कीटनाशक, जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों के उपयोग पर जोर दिया गया है।

हैचरी प्रबंधन और पोषण

हैचरी संचालकों को बेहतर निषेचन दर और स्पान की उत्तरजीविता सुनिश्चित करने के लिए प्रोटीन युक्त आहार, प्रोबायोटिक और सूक्ष्म खनिज तत्व देने की सलाह दी गई है। साथ ही नर और मादा प्रजनक मछलियों को 15 दिनों से एक माह तक अलग-अलग रखना आवश्यक बताया गया है।

तालाब प्रबंधन के निर्देश

विभाग ने तालाबों की नियमित सफाई, खरपतवार नियंत्रण और अवांछनीय मछलियों को हटाने पर बल दिया है। कॉमन कार्प मत्स्य बीज संचय से पहले 150-250 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बुझे हुए चूने का उपयोग करने की सलाह भी दी गई है।

इसके अलावा, मत्स्य पालकों को प्लैंकटन नेट से पानी में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता की जांच करने और समय-समय पर जाल चलाकर मछलियों की वृद्धि और स्वास्थ्य की निगरानी करने को कहा गया है।

जल स्तर और विशेष सावधानियां

तालाब में वर्षभर कम से कम 1.5 मीटर जल स्तर बनाए रखना जरूरी बताया गया है। हालांकि, पंगेशियस मछली वाले तालाबों में जाल चलाने से बचने की हिदायत दी गई है। विभाग ने मत्स्य पालकों से अपील की है कि वे इन वैज्ञानिक सलाहों का पालन करें, जिससे मछलियों की बेहतर देखभाल के साथ-साथ उनकी आय में भी वृद्धि हो सके।

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