बिहार से दवा बाहर कैसे पहुंची? ट्राइडस सील पर परवेज का बयान—कहा, किशनगंज तक ही सप्लाई, दूसरे राज्यों में नहीं भेजते

Puja Srivastav
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NEWS PR डेस्क : दवा बाजार में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आ रही है। जिस दवा को लेकर कंपनी का दावा है कि उसकी आपूर्ति बिहार में भी केवल किशनगंज तक सीमित थी, वही दवा अन्य राज्यों के बाजारों में बिकती पाई गई। नुकसानदेह रसायनों के आरोप में जहां दूसरे राज्यों में इस दवा पर प्रतिबंध लगाया गया, वहीं बिहार में कंपनी को सील कर दिया गया।

दवा कारोबार में तस्करी और दस्तावेजों में हेराफेरी के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। तमिलनाडु और तेलंगाना समेत कई राज्यों में खतरनाक रसायनों की मौजूदगी के चलते जिस ‘आलमोंट किड सिरप’ पर प्रतिबंध लगाया गया है, वह आधिकारिक रिकॉर्ड में बिहार से बाहर भेजी ही नहीं गई थी।

दवा निर्माता ट्राइडस रेमेडीज के मालिक अहमद परवेज का कहना है कि बिहार में यह दवा केवल किशनगंज जिले तक ही सप्लाई की गई थी। इसके बावजूद यह सिरप कई अन्य राज्यों के बाजारों में पाया गया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि या तो किशनगंज के रास्ते इसकी अवैध आपूर्ति हुई है, या फिर कागजों में किशनगंज दिखाकर कंपनी ने खुद ही दवा को दूसरे राज्यों में भेजा।

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हाजीपुर के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित दवा निर्माण कंपनी की दवाओं की बिक्री पर रोक लगाए जाने के बाद ड्रग इंस्पेक्टर ने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की। जांच पूरी होने के बाद संबंधित कंपनी को सील कर दिया गया। इसके साथ ही बाजार में उपलब्ध दवाओं को वापस मंगाकर कंपनी परिसर में सुरक्षित रखा गया है। बताया गया कि कार्रवाई के दौरान कंपनी परिसर में कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था और फिलहाल कंपनी का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार, ट्राइडस रेमेडीज प्राइवेट लिमिटेड की औद्योगिक इकाई में तैयार किए जा रहे सिरप का सेंट्रल ड्रग इंस्पेक्टर ने अक्तूबर महीने में सैंपल लिया था। इस सैंपल की जांच रिपोर्ट हाल ही में प्राप्त हुई है, जिसमें अल्मोंट-किड सिरप में एथिलीन ग्लाइकोल जैसे खतरनाक रसायन की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद केंद्रीय औषधि नियंत्रक ने इस दवा की बिक्री, वितरण और उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया। यह सिरप हाजीपुर के औद्योगिक थाना क्षेत्र स्थित औद्योगिक इकाई में निर्मित किया जा रहा था।

यह दवा बच्चों में एलर्जी से जुड़े लक्षणों—जैसे नाक बहना, छींक आना, खुजली, सूजन, जलन और आंखों से पानी आना—के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती थी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि एथिलीन ग्लाइकोल बेहद जहरीला रसायन है, जिसका सेवन बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इससे पहले भी तमिलनाडु में बनी एक सिरप में इसी रसायन की मिलावट सामने आने के बाद मध्य प्रदेश में कुछ महीने पहले कई बच्चों की मौत का मामला उजागर हुआ था।

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