चारा घोटाला मामले में लालू यादव की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट में जमानत रद्द करने की याचिका पर होगी सुनवाई

Asha Rai
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NEWS PR डेस्क: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू यादव की कानूनी चुनौतियां एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। मंगलवार को दिल्ली में चारा घोटाला मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उनकी जमानत रद्द करने की याचिका दाखिल की है, जिस पर आज सुनवाई होगी। सीबीआई के अलावा झारखंड सरकार ने भी उनकी जमानत रद्द करने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि झारखंड हाईकोर्ट ने चारा घोटाले से जुड़े मामलों में लालू यादव को जमानत दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।

क्या फिर जाना पड़ सकता है जेल?

अगर सुप्रीम कोर्ट सीबीआई की याचिका स्वीकार कर लेती है और जमानत रद्द कर देती है, तो लालू यादव को दोबारा जेल जाना पड़ सकता है।

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हाल ही में ‘लैंड फॉर जॉब’मामले में भी वे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए थे, जहां उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया।

क्या था चारा घोटाला?

चारा घोटाला बिहार के इतिहास के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में गिना जाता है। इस मामले में 1990 के दशक के दौरान पशुपालन विभाग से करीब ₹950 करोड़ की अवैध निकासी का आरोप है। उस समय लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे।

यह घोटाला पशुओं के चारे, दवाओं और कृषि उपकरणों की खरीद के नाम पर फर्जी बिल बनाकर सरकारी खजाने से रकम निकालने से जुड़ा था। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए—

 कागजों पर हजारों काल्पनिक गाय-भैंसें दिखाकर उनके चारे और दवाओं के नाम पर भुगतान।

 जिन वाहनों से चारा ढुलाई दिखाई गई, वे नंबर जांच में स्कूटर और मोटरसाइकिल के निकले।

 चाईबासा, देवघर, दुमका और डोरंडा जैसे जिलों के कोषागारों से बजट से कई गुना अधिक निकासी।

एक बिल में भैंसों के सींग चमकाने के लिए हजारों टन सरसों तेल खरीदने का दावा।

कैसे सामने आया मामला?

जनवरी 1996 में चाईबासा के तत्कालीन उपायुक्त अमित खरे की छापेमारी के बाद इस घोटाले का खुलासा हुआ। मार्च 1996 में पटना हाईकोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई।

जांच में नाम सामने आने और गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद 1997 में लालू यादव को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। बाद में उनकी पत्नी Rabri Devi  को मुख्यमंत्री बनाया गया।

किन मामलों में मिली सजा?

सीबीआई ने कुल 53 मामले दर्ज किए थे, जिनमें से पांच प्रमुख मामलों में लालू यादव को दोषी ठहराया गया—

चाईबासा (RC 20A/96): ₹37.7 करोड़ की निकासी – 2013 में सजा।

देवघर मामला: ₹89.27 लाख की निकासी – 2017 में सजा।

दूसरा चाईबासा मामला: ₹33.13 करोड़ की निकासी – 2018 में सजा।

दुमका मामला: ₹3.76 करोड़ की निकासी – 14 साल की सजा।

डोरंडा मामला: ₹139.35 करोड़ की निकासी – 2022 में सजा।

फिलहाल लालू यादव आधी सजा पूरी करने और खराब स्वास्थ्य के आधार पर जमानत पर बाहर हैं। दूसरी ओर बिहार सरकार घोटाले की राशि की वसूली के लिए दोषियों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी में है।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस पूरे मामले में नया मोड़ ला सकती है।

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