सरकार का बड़ा फैसला: बिहार में पंचायतों का होगा बड़ा पुनर्गठन, ज्यादा आबादी वाला गांव ही बनेगा मुख्यालय

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: बिहार सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में व्यापक बदलाव का फैसला लिया है। पंचायती राज विभाग की नई अधिसूचना के तहत अब राज्य की सभी ग्राम पंचायतों का गठन और परिसीमन (डिलिमिटेशन) राजस्व ग्राम के आधार पर किया जाएगा। इस संबंध में विभाग के सचिव मनोज कुमार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य की बड़ी संख्या में पंचायतों की भौगोलिक सीमाएं, मुख्यालय और नाम बदल सकते हैं। सरकार का कहना है कि यह बदलाव प्रशासनिक सुविधा, जनसंख्या के संतुलन और स्थानीय शासन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

2011 की जनगणना बनेगी आधार

परिसीमन की पूरी प्रक्रिया वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर पूरी की जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप सभी जिलों के जिलाधिकारी अपने-अपने प्रखंडों में नए ग्राम पंचायत क्षेत्रों का निर्धारण करेंगे। इसके साथ ही जिला परिषद, पंचायत समिति और वार्डों के परिसीमन को लेकर भी अलग-अलग दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

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सबसे अधिक आबादी वाले गांव के नाम पर होगी पंचायत

नए नियम के अनुसार, यदि किसी पंचायत में एक से अधिक राजस्व गांव शामिल होंगे तो पंचायत का मुख्यालय उसी गांव में बनाया जाएगा, जिसकी आबादी सबसे ज्यादा होगी। पंचायत का आधिकारिक नाम भी उसी गांव के नाम पर रखा जाएगा।

हालांकि, सरकार ने सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान भी किया है। यदि किसी पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों की संयुक्त आबादी कुल आबादी के 50 प्रतिशत से अधिक है, तो मुख्यालय उस गांव में स्थापित किया जाएगा जहां इन वर्गों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक होगा।

सीमा निर्धारण के लिए तय किए गए स्पष्ट मानक

अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक प्रखंड को परिसीमन के लिए अलग प्रशासनिक इकाई माना जाएगा। पंचायतों की सीमाएं उत्तर-पश्चिम दिशा से शुरू होकर दक्षिण-पूर्व दिशा तक निर्धारित की जाएंगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी राजस्व ग्राम को दो अलग-अलग पंचायतों में न बांटा जाए। केवल असाधारण स्थिति में, जब किसी एक गांव की आबादी बहुत अधिक हो, तभी उसे एक से अधिक पंचायतों में विभाजित किया जा सकेगा।

सीमाओं को स्पष्ट और विवादमुक्त बनाने के लिए सड़क, रेलवे लाइन, नदी, नहर और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थलों को प्राकृतिक सीमा के रूप में चिह्नित किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की निगरानी संबंधित प्रमंडलीय आयुक्त करेंगे।

आने वाले पंचायत चुनावों पर भी पड़ेगा असर

सरकार के इस फैसले का असर केवल पंचायतों के नाम बदलने तक सीमित नहीं रहेगा। नए परिसीमन के बाद पंचायतों की सीमाएं, मुख्यालय, वार्डों का स्वरूप और भविष्य में होने वाले पंचायत चुनावों की संरचना भी बदल जाएगी। सरकार का मानना है कि इस पुनर्गठन से स्थानीय निकायों का संचालन अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और जनसंख्या के अनुरूप हो सकेगा।

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