बिहार कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल: ब्राह्मण-यादव नेताओं को बढ़ी अहमियत, दलितों का प्रतिनिधित्व घटा

Amit Singh
- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

NEWS PR डेस्क पटना,31 मार्च। बिहार में हालिया विधानसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अब खुद को नए सिरे से मजबूत करने में जुट गई है। इसी कड़ी में पार्टी ने राज्य स्तर पर बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए 53 जिलाध्यक्षों की नई सूची जारी की है।

नई सूची में सबसे खास बात यह है कि पार्टी ने बड़े पैमाने पर नए चेहरों को मौका दिया है। कुल 53 में से 43 जिलों में नए नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि 10 मौजूदा जिलाध्यक्षों पर भरोसा बरकरार रखा गया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस इस बदलाव के जरिए जमीनी स्तर पर नई ऊर्जा लाने की कोशिश कर रही है।

चुनाव में सिर्फ 6 सीटों पर सिमटने के बाद पार्टी के अंदर उठे असंतोष और आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह कदम अहम माना जा रहा है। उस समय प्रदेश नेतृत्व, जिसमें राजेश राम और प्रभारी कृष्णा अल्लावरू शामिल थे, को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। अब चार महीने बाद संगठन को फिर से खड़ा करने की दिशा में यह पहली बड़ी पहल है।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

नई नियुक्तियों में सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखती है। ब्राह्मण और यादव समुदाय से सबसे ज्यादा 10-10 नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा 7-7 मुस्लिम, दलित और भूमिहार जातियों के नेताओं को भी जिलाध्यक्ष बनाया गया है। जबकि राजपूत समुदाय को भी हिस्सेदारी मिली है। इस तरह पार्टी ने पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ नए समीकरण साधने का संकेत दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम आने वाले समय में उसकी रणनीति को भी दर्शाता है। खासकर यादव नेताओं को बड़ी संख्या में जिम्मेदारी देना यह संकेत देता है कि पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के प्रभाव वाले वोट बैंक में भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

गौरतलब है कि कांग्रेस ने पहले अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए जिलों की संख्या 40 से बढ़ाकर 53 कर दी थी। इसके बाद पर्यवेक्षकों की नियुक्ति, कार्यकर्ताओं के इंटरव्यू और विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर इन नामों को अंतिम रूप दिया गया।

अब देखना होगा कि यह नया संगठनात्मक ढांचा कांग्रेस को बिहार की राजनीति में कितनी मजबूती दिला पाता है। फिलहाल पार्टी ने संकेत दे दिया है कि वह आने वाले चुनावों को लेकर पूरी तैयारी में जुट चुकी है।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →
Share This Article