पटना में मीट-मछली दुकानों पर प्रशासन का डंडा: बिना लाइसेंस दुकान सील, हर शॉप पर लगेगा QR कोड

Asha Rai
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NEWS PR डेस्क: बिहार की राजधानी पटना में मांस और मछली की बिक्री को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव लागू किया गया है। Patna Municipal Corporation (पीएमसी) ने नई गाइडलाइन जारी कर स्पष्ट किया है कि अब शहर में कोई भी मीट या फिश शॉप बिना वैध लाइसेंस के संचालित नहीं हो सकेगी।

नगर निगम का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता, पारदर्शिता और सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों को मजबूत करना है।

हर दुकान की होगी डिजिटल पहचान

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नगर आयुक्त यशपाल मीणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी मांस-मछली विक्रेताओं को वार्षिक लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।

सामान्य दुकानदारों के लिए लाइसेंस शुल्क: ₹2000 प्रति वर्ष
बीपीएल श्रेणी के विक्रेताओं के लिए आवेदन शुल्क: मात्र ₹20

लाइसेंस जारी होने के बाद हर दुकान को एक यूनिक QR कोड दिया जाएगा। इस कोड में दुकान का नाम, संचालक का विवरण, लाइसेंस की वैधता और स्वच्छता मानकों की जानकारी दर्ज रहेगी। ग्राहक मोबाइल से QR कोड स्कैन कर दुकान की वैधता की जांच कर सकेंगे।

1400 से अधिक अवैध दुकानों की पहचान

हालिया सर्वे में शहर के विभिन्न इलाकों में 1400 से अधिक ऐसी दुकानें चिन्हित की गईं, जो या तो बिना लाइसेंस चल रही थीं या स्वच्छता मानकों का पालन नहीं कर रही थीं।

इन दुकानदारों को नोटिस जारी कर तय समयसीमा में लाइसेंस के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया गया है। समय पर आवेदन नहीं करने पर जुर्माना, लाइसेंस रद्द करने और दुकान सील करने जैसी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

उड़नदस्ता टीम करेगी निगरानी

नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए निगम एक विशेष उड़नदस्ता टीम गठित करने जा रहा है। । यह टीम औचक निरीक्षण कर खुले में बिक्री, गंदगी, कचरा प्रबंधन और स्वास्थ्य मानकों की जांच करेगी।

नियमों के उल्लंघन पर आर्थिक दंड और लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई की जाएगी।

धार्मिक स्थलों और स्कूलों के पास प्रतिबंध

नई गाइडलाइन के अनुसार मंदिर, मस्जिद या अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास मांस-मछली की बिक्री पर रोक रहेगी। स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों के पास भी ऐसी दुकानों को अनुमति नहीं दी जाएगी।

नगर निगम का मानना है कि डिजिटल पहचान, नियमित लाइसेंसिंग और सख्त निगरानी से राजधानी का मीट-फिश बाजार अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता स्तर में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत होगा।

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