NEWS PR डेस्क : पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव के मद्देनज़र आचार संहिता प्रभावी कर दी गई है। प्रशासन ने इस बार कई सख्त और नए नियम लागू किए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान जानवरों के इस्तेमाल, अनावश्यक खर्च और लाउडस्पीकर के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। करीब 20 हजार छात्र इस चुनाव में अपने वोट का इस्तेमाल करेंगे और मतदान के जरिए कैंपस की नई छात्र सरकार का चयन करेंगे।
28 फरवरी को प्रस्तावित पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ (PUSU) चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस चुनाव में करीब 20 हजार छात्र अपने प्रतिनिधियों के चयन के लिए मतदान करेंगे। मुख्य चुनाव पदाधिकारी शंकर कुमार ने बताया कि छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मतदाता सूची विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने जानकारी दी कि मतदाता सूची का प्रारूप 6 फरवरी को जारी किया गया था। इसके बाद 7 से 9 फरवरी के बीच त्रुटि सुधार से संबंधित आवेदन स्वीकार किए गए। नामांकन पत्रों की बिक्री 11 फरवरी सुबह 10 बजे से शुरू होकर 14 फरवरी दोपहर 3 बजे तक चलेगी। प्रत्येक नामांकन पत्र की कीमत 50 रुपये निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को नामांकन पत्र के साथ छात्र संघ चुनाव से जुड़े सामान्य दिशा-निर्देश और आचार संहिता की 16 पृष्ठों की पुस्तिका भी दी जाएगी।
इसी अवधि में अभ्यर्थी परीक्षा नियंत्रक कार्यालय से ‘शैक्षणिक वर्ष न होने का प्रमाण पत्र’ भी प्राप्त कर सकेंगे। 28 फरवरी को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पांच प्रमुख पदों के लिए मतदान होगा। इसके अतिरिक्त विभिन्न इकाइयों से कुल 24 पार्षदों का चुनाव भी किया जाएगा।
पार्षद पदों का इकाईवार बंटवारा इस प्रकार है— पटना महिला महाविद्यालय से 5, मगध महिला महाविद्यालय से 3, बीएन कॉलेज, पटना कॉलेज और पटना साइंस कॉलेज से दो-दो, वाणिज्य महाविद्यालय, पटना विधि महाविद्यालय, महिला प्रशिक्षण महाविद्यालय, पटना प्रशिक्षण महाविद्यालय और कला एवं शिल्प महाविद्यालय से एक-एक प्रतिनिधि चुना जाएगा। वहीं सामाजिक विज्ञान संकाय से 2, मानविकी संकाय, विज्ञान संकाय तथा वाणिज्य, विधि एवं शिक्षा संकाय से एक-एक पार्षद का निर्वाचन होगा।
छात्रसंघ चुनाव में इस बार सख्त नियम लागू किए गए हैं। प्रचार के दौरान मुद्रित पोस्टर, पर्चे या किसी भी तरह की छपी सामग्री के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक रहेगी। उम्मीदवार केवल हाथ से बनाए गए पोस्टर और फोटोकॉपी का सीमित उपयोग कर सकेंगे।
लाउडस्पीकर, वाहन और जानवरों के उपयोग की अनुमति नहीं होगी। अनावश्यक खर्च पर भी प्रतिबंध रहेगा और किसी भी राजनीतिक दल की सीधी भागीदारी स्वीकार्य नहीं होगी। यह व्यवस्था कुलाधिपति द्वारा लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप स्वीकृत नियमावली के तहत लागू की गई है।
विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बिना प्रोक्टर या प्राचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के कोई जुलूस या सार्वजनिक सभा आयोजित नहीं की जा सकेगी। हालांकि छात्र राजनीतिक संगठन सक्रिय हैं, लेकिन लिंगदोह समिति का उद्देश्य बड़े बजट और भारी प्रचार-प्रसार को सीमित कर छात्रसंघ चुनाव को पूरी तरह ‘कैंपस-केंद्रित’ बनाए रखना है, ताकि चुनाव की मूल भावना बरकरार रहे।
पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ (पीयूएसयू) चुनाव की घोषणा होते ही आचार संहिता प्रभावी हो गई है। मुख्य संरक्षक एवं कार्यवाहक कुलपति प्रो. नमिता सिंह ने चुनाव कार्यक्रम जारी करते हुए इसकी औपचारिक शुरुआत की। इसके साथ ही पूर्व पीयूएसयू स्वतः भंग हो गया। अधिसूचना के अनुसार मतदान 28 फरवरी को कराया जाएगा।
प्रो. नमिता सिंह ने अपने चार महीने से कुछ अधिक के कार्यकाल में विश्वविद्यालय की कई व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की पहल की है। इस बार चुनाव पीयूएसयू के एक वर्ष के तय कार्यकाल की समाप्ति से पहले कराए जा रहे हैं, ताकि आगे से नियमित और समयबद्ध चुनाव की परंपरा स्थापित की जा सके।
गौरतलब है कि 2025 में छात्रसंघ चुनाव दो साल से अधिक के अंतराल के बाद संपन्न हुए थे, जबकि इससे पहले भी कई वर्षों तक चुनाव टलते रहे। 1984 के बाद हिंसा की आशंका के कारण 2012 तक चुनाव नहीं हो पाए थे। इसके बाद 2018 में पांच साल से ज्यादा के अंतराल के बाद फिर से चुनाव आयोजित किए गए।
चुनाव प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों और उनके समर्थकों के लिए प्रमाणित पहचान पत्र रखना अनिवार्य होगा, जिसे संस्थान या चुनाव कार्यालय की ओर से जारी किया जाएगा। प्रचार में किए गए हर खर्च का पूरा विवरण सुरक्षित रखना होगा और मतदान के बाद निर्धारित दो सप्ताह के भीतर पर्यवेक्षकों को जांच के लिए प्रस्तुत करना होगा। उम्मीदवार केवल छात्र समुदाय से स्वैच्छिक सहयोग ले सकते हैं, अन्य किसी स्रोत से आर्थिक सहायता लेना नियमों के विरुद्ध होगा।
प्रचार सामग्री को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश हैं। किसी भी प्रकार के मुद्रित पोस्टर, पर्चे या अन्य छपी सामग्री के उपयोग की अनुमति नहीं होगी। अभ्यर्थी केवल हाथ से तैयार पोस्टर और फोटोकॉपी का सीमित इस्तेमाल कर सकेंगे।
चुनाव पांच केंद्रीय पदों के साथ-साथ 10 अलग-अलग स्नातकोत्तर संकायों और प्रत्येक कॉलेज के पार्षद पदों के लिए कराए जाएंगे। पिछली बार केंद्रीय पैनल की पांच में से तीन सीटों पर महिला उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इनमें अध्यक्ष पद पर भाजपा से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की प्रत्याशी विजयी रही थीं, जबकि उपाध्यक्ष और महासचिव पद पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी थी। वह चुनाव बेहद करीबी मुकाबले वाला रहा था।