पश्चिम एशिया संकट पर प्रधानमंत्री का लोकसभा में बयान: भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च, ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने पर फोकस

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली, 23 मार्च। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर गंभीर असर डाल रहे हैं और भारत भी इससे अछूता नहीं है। सरकार की प्राथमिकता भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखना और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को कम करना है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस संकट के दौरान भारत ने युद्ध प्रभावित देशों में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है। अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित देश लाया जा चुका है, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र भी शामिल हैं। सरकार ने 24×7 कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन और दूतावासों के जरिए लगातार सहायता उपलब्ध कराई है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है, क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा यहीं से पूरा होता है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्गों पर तनाव के बावजूद सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई को सुचारू बनाए रखने में जुटी है। साथ ही एलपीजी की घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है।

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ऊर्जा सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने आयात के स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक किया है। इसके अलावा देश में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व तैयार किया गया है, जिसे और बढ़ाने की योजना है।

कृषि क्षेत्र पर संभावित असर को लेकर उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार है और किसानों को किसी भी संकट से बचाने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। उर्वरक की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए भी विशेष कदम उठाए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए देश के पावर सेक्टर की तैयारियां मजबूत हैं। कोयला उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा और सौर क्षमता में बढ़ोतरी से स्थिति को संभालने में मदद मिल रही है।

कूटनीतिक स्तर पर भारत ने सभी पक्षों से संवाद बनाए रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने कई देशों के नेताओं से बातचीत कर तनाव कम करने और शांति स्थापित करने का आग्रह किया है। भारत ने नागरिक और व्यापारिक ढांचे पर हमलों का विरोध करते हुए सुरक्षित समुद्री मार्गों की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि “संवाद और कूटनीति ही इस संकट का एकमात्र समाधान है।” साथ ही देश के भीतर कानून-व्यवस्था, साइबर सुरक्षा और सीमाई सुरक्षा को भी और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एकजुट रहने, अफवाहों से बचने और संकट की घड़ी में संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि “जब देश एकजुट होता है, तो हर चुनौती का सामना करना संभव होता है।”

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