फरक्का संधि पर सियासी घमासान, विजय चौधरी ने लालू यादव के बयान पर किया पलटवार

Shreya Raj
फरक्का संधि को लेकर सियासी घमासान, लालू यादव और विजय चौधरी के बयानों से गरमाई बिहार की राजनीति।

NEWS PR डेस्क: बिहार में बाढ़ और गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच फरक्का बैराज को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। फरक्का जल समझौते को लेकर आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बयान पर बिहार के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने जवाब दिया है। उन्होंने समझौते के समय की राजनीतिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए लालू यादव पर सवाल खड़े किए हैं।

1996 के समझौते को लेकर विजय चौधरी का पलटवार

विजय कुमार चौधरी ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर वर्ष 1996 में समझौता हुआ था। उस समय बिहार की सत्ता लालू प्रसाद यादव के हाथों में थी। ऐसे में आज फरक्का समझौते के लिए मौजूदा सरकार या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि फरक्का बैराज से जुड़ा मुद्दा बिहार के लिए काफी पुराना है। गंगा में लगातार जमा होने वाली गाद और नदी के प्रवाह में होने वाले बदलाव का असर राज्य के कई हिस्सों पर पड़ता है। इसका सीधा प्रभाव बाढ़ की स्थिति पर भी देखने को मिलता है।

समझौते के नवीनीकरण में बिहार के हित की मांग

जल संसाधन मंत्री ने संकेत दिया कि पुराने समझौते की अवधि पूरी होने के बाद इसके अगले चरण को लेकर चर्चा महत्वपूर्ण होगी। बिहार सरकार चाहती है कि भविष्य में होने वाली बातचीत में राज्य की जरूरतों और हितों को प्रमुखता दी जाए।

उन्होंने बताया कि बिहार की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष गंगा, फरक्का और जल प्रबंधन से जुड़े विषयों को रखा गया है। राज्य का पक्ष है कि बिहार को लंबे समय से प्रभावित करने वाली गाद और बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान तलाशा जाना चाहिए।

गंगा में गाद बढ़ना बड़ी चुनौती

विजय चौधरी ने गंगा में लगातार बढ़ रही सिल्ट को भी गंभीर समस्या बताया। उनका कहना है कि नदी में अधिक मात्रा में गाद जमा होने से उसके प्राकृतिक बहाव और जल निकासी की क्षमता पर असर पड़ता है। इसके चलते कई क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

उन्होंने केंद्र और राज्य के स्तर पर मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई, जिससे गाद प्रबंधन के साथ-साथ बाढ़ की समस्या को भी नियंत्रित किया जा सके।

बाढ़ की स्थिति पर सरकार की नजर

फरक्का विवाद के बीच बिहार के कई इलाकों में गंगा का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। नदी के आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

सरकार का कहना है कि तटबंधों और नदी के जलस्तर की निगरानी लगातार की जा रही है। जरूरत के अनुसार संबंधित विभागों को मौके पर कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं।

फरक्का जल समझौते को लेकर विजय चौधरी के बयान के बाद बिहार की राजनीति में इस मुद्दे पर बहस और तेज हो गई है। एक ओर जहां विपक्ष इसे बिहार के हितों से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार पुराने समझौते की परिस्थितियों और उसके समय की राजनीतिक जिम्मेदारियों का हवाला दे रही है। आने वाले दिनों में फरक्का, गंगा की गाद और बिहार के जल अधिकार का मुद्दा राजनीतिक बहस का अहम केंद्र बन सकता है।

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