बिजली लाइन पर बवाल: नवादा में ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, पुलिस की लाठियों से महिला-युवा जख्मी

Amit Singh
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NEWSPR डेस्क। नवादा जिले के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के चैनपुरा गांव में शुक्रवार को विकास और जमीन के अधिकार के बीच संघर्ष खुलकर सामने आ गया। अडानी ग्रुप की इकाई अंबुजा सीमेंट की निर्माणाधीन ग्राइंडिंग यूनिट को 133 केवी हाई वोल्टेज बिजली सप्लाई देने के लिए जैसे ही बिजली पोल और टावर लगाने का काम शुरू हुआ, ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। कुछ ही देर में पूरा गांव हताशा और विरोध का रणक्षेत्र बन गया।

“जमीन छीनी जा रही है”—ग्रामीणों का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित हाई वोल्टेज लाइन उनके पश्चिमी हिस्से की पुश्तैनी आवासीय और खेती योग्य जमीन से जबरन गुजारी जा रही है। लोगों का आरोप है कि: मुआवजा उचित नहीं है, रजामंदी नहीं ली गई, और लाइन गुजरने के बाद जमीन का कोई भविष्य नहीं बचेगा—ना घर बनाने लायक रहेगी, ना उसकी बाजार कीमत। इसी नाराजगी के साथ सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, जिनमें महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल थे, मौके पर जुट गए और काम बंद कराने की मांग करने लगे।

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पुलिस-ग्रामीण टकराव: लाठीचार्ज से बिगड़ामाहौल

विरोध बढ़ता देख स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।
उनके मुताबिक, एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई महिलाएं और युवा शामिल हैं। लाठीचार्ज के बाद गांव में खौफ और गुस्सा दोनों फैल गया।

गांव में उबाल—“यह जबरन भूमि अधिग्रहण है”

घटना के बाद चैनपुरा गांव में माहौल बेहद गर्म है। ग्रामीण इस कार्रवाई को ‘जबरन भूमि हड़पने की साजिश’ बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि: “कॉरपोरेट का प्रोजेक्ट गरीब किसानों की जमीन और भविष्य दोनों को कुचल रहा है।” गांव में बड़े आंदोलन की तैयारी भी शुरू हो गई है। प्रशासन का बचाव—मुआवजा मिलेगा, लाठीचार्ज नहीं हुआ वहीं प्रशासन ने खुद को बचाव में उतारते हुए कहा है— सदर एसडीएम अमित अनुराग ने दावा किया कि प्रभावित किसानों को कानूनी प्रावधानों के तहत मुआवजा दिया जाएगा। पुलिस ने लाठीचार्ज के आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि सिर्फ “हल्का बल प्रयोग” किया गया। प्रशासन का कहना है कि परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी है और सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

बड़ा सवाल—क्या चैनपुरा की आवाज सुनी जाएगी?

यह घटना अडानी ग्रुप की परियोजनाओं के खिलाफ बढ़ते स्थानीय विरोध की एक और कड़ी बन गई है। अब बड़ा सवाल यह है कि: क्या ग्रामीणों की जमीन और हक़ की लड़ाई सुनी जाएगी? या हाई-वोल्टेज लाइन का शोर उनकी आवाज को एक बार फिर दबा देगा?

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