छठ महापर्व की तैयारियां जोर पर, डीएम ने घाटों का किया निरीक्षण — 108 घाटों पर पूजा, 5 को असुरक्षित घोषित

Jyoti Sinha
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लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत 25 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ होगी। पर्व को लेकर पटना जिला प्रशासन ने पूरी तैयारी तेज कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने गुरुवार को संबंधित अधिकारियों और नगर निगम टीम के साथ विभिन्न घाटों का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

108 घाटों पर होगी पूजा, 5 घाटों पर रोक

डीएम ने बताया कि जिले में इस बार करीब 500 घाट बनाए गए हैं। इनमें से पटना नगर निगम क्षेत्र के 108 घाटों को छठ पूजा के लिए चिन्हित किया गया है। निरीक्षण के बाद इनमें से 98 घाटों को सुरक्षित पाया गया है, जबकि 5 घाटों को खतरनाक घोषित किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि असुरक्षित घाटों पर श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

केवल पैदल पहुंच सकेंगे श्रद्धालु

जिलाधिकारी ने कहा कि छठ घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं को सिर्फ पैदल मार्ग से ही पहुंचने की अनुमति दी जाएगी। भीड़ और ट्रैफिक जाम से बचने के लिए अलग-अलग घाटों के पास विशेष पार्किंग व्यवस्था की गई है।
सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से ट्रैफिक पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और मेडिकल टीमों की तैनाती की जा रही है। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि घाटों पर सफाई, रोशनी और बैरिकेडिंग की व्यवस्था समय पर पूरी हो।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि श्रद्धालु सुरक्षित, स्वच्छ और शांतिपूर्ण माहौल में छठ पर्व मना सकें।”

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छठ महापर्व का कार्यक्रम

  • 25 अक्टूबर (शनिवार): नहाय-खाय — इस दिन व्रती महिलाएं सात्विक भोजन करती हैं और व्रत की तैयारी शुरू होती है।
  • 26 अक्टूबर (रविवार): खरना — शाम को गुड़ की खीर और रोटी बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसी के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ होता है।
  • 27 अक्टूबर (सोमवार): डूबते सूर्य को अर्घ्य — महिलाएं और श्रद्धालु घाटों पर पहुंचकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देती हैं और छठ मईया से परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
  • 28 अक्टूबर (मंगलवार): उगते सूर्य को अर्घ्य — अंतिम दिन व्रती महिलाएं उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करती हैं। इस दौरान पूरे परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की जाती है।

पटना जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षा निर्देशों का पालन करें, असुरक्षित घाटों से दूर रहें और सहयोग कर इस पावन पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से मनाएं।

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