NEWS PR डेस्क: महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से पटना पुलिस ने महिला पुलिसकर्मियों को स्कूटी उपलब्ध कराई है, लेकिन योजना के जमीनी क्रियान्वयन में शुरुआती अड़चन सामने आई है। जानकारी के अनुसार, ‘पुलिस दीदी’ की भूमिका निभा रहीं करीब आधी महिला पुलिसकर्मियों को दोपहिया वाहन चलाने में परेशानी हो रही है। इनमें लगभग 10 फीसदी महिला पुलिसकर्मी ऐसी भी हैं, जिन्हें स्कूटी या बाइक चलाने का अनुभव नहीं है और उनके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं है। ऐसे में थानों तक पहुंचाई गई स्कूटी का फील्ड पुलिसिंग में अपेक्षित इस्तेमाल चुनौती बन गया है।

स्कूटी नहीं चला पाने वालों पर विभाग का सख्त रुख
सिटी एसपी मध्य ममता कल्याणी ने बताया कि जिन महिला पुलिसकर्मियों को दोपहिया वाहन चलाना नहीं आता, उनके स्थान पर ऐसी पुलिसकर्मियों को जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा रहा है, जो वाहन चलाने में सक्षम हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत के अनुसार स्कूटी चलाने में असमर्थ महिला पुलिसकर्मियों का ग्रामीण इलाकों में तबादला किया जा सकता है। विभाग का फोकस ऐसी महिला पुलिस टीम तैयार करने पर है, जो थाने से बाहर निकलकर नियमित रूप से क्षेत्र में काम कर सके।
36 थानों को मिली 360 स्कूटी
पटना जिले के 36 पुलिस थानों के लिए कुल 360 स्कूटी उपलब्ध कराई गई हैं। प्रत्येक थाने को 10-10 स्कूटी दी गई है। इन वाहनों का इस्तेमाल महिला पुलिसकर्मियों को क्षेत्र भ्रमण के लिए करना है। ‘पुलिस दीदी’ की जिम्मेदारी के तहत उन्हें महिलाओं और छात्राओं से संपर्क करने, उनकी समस्याएं समझने, सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस सहायता पहुंचाने जैसे काम करने हैं।
ट्रेनिंग के बाद फील्ड में उतरने की तैयारी
कुछ महिला पुलिसकर्मियों ने बताया कि उन्हें फिलहाल स्कूटी चलाने में पूरी दक्षता नहीं है। ऐसी पुलिसकर्मियों का कहना है कि वे पहले ड्राइविंग सीखेंगी और इसके बाद नियमित रूप से स्कूटी के जरिए इलाके में गश्त और निरीक्षण करेंगी। यानी विभाग के सामने केवल वाहनों का वितरण ही नहीं, बल्कि उन्हें चलाने के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित महिला पुलिस बल तैयार करना भी अहम चुनौती है।
कुछ थानों में महिला बल की कमी
सिटी एसपी मध्य के मुताबिक कुछ थानों से महिला पुलिसकर्मियों की संख्या कम होने की सूचना मिली है। इस कमी को दूर करने के लिए पुलिस लाइन से अतिरिक्त महिला बल उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसका उद्देश्य जरूरत के हिसाब से अलग-अलग थानों में पर्याप्त महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती करना है, ताकि ‘पुलिस दीदी’ व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे और इसका प्रभाव सीधे फील्ड में दिखाई दे।
महिला कॉलेजों के बाहर कब दिखेगी ‘पुलिस दीदी’?
योजना का उद्देश्य महिलाओं और छात्राओं को उनके रोजमर्रा के क्षेत्रों में सुरक्षा का भरोसा देना है। हालांकि, अब तक किसी महिला कॉलेज के मुख्य गेट पर ‘पुलिस दीदी’ की नियमित मौजूदगी सामने नहीं आई है। सचिवालय थाना परिसर में भी स्कूटियों के खड़े रहने की जानकारी सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि जिन वाहनों को फील्ड पुलिसिंग के लिए दिया गया है, उनका वास्तविक इस्तेमाल कितनी तेजी से शुरू होगा।
सेल्फी से होगी फील्ड ड्यूटी की निगरानी
विभाग ने महिला पुलिसकर्मियों की फील्ड गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक व्यवस्था भी तय की है। क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान पुलिस दीदी के रूप में तैनात कर्मियों को मौके से सेल्फी लेकर विभाग को भेजनी होगी। इस व्यवस्था के पीछे उद्देश्य यह पता लगाना है कि स्कूटी का इस्तेमाल वास्तव में क्षेत्र भ्रमण और महिला सुरक्षा से जुड़े कार्यों में हो रहा है या नहीं।