NEWSPR डेस्क। पटना बिहार में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। गया और वैशाली की घटनाओं के बाद अब राजधानी पटना से खाकी को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। पटना सिटी के चौक थाना क्षेत्र में पुलिस पर एक महादलित परिवार के घर में जबरन घुसकर लूट, तोड़फोड़ और जातिसूचक गाली-गलौज जैसे बेहद गंभीर आरोप लगे हैं।
पीड़िता मंजू देवी ने इस मामले में पटना के वरीय आरक्षी अधीक्षक (SSP) को लिखित शिकायत दी है। आवेदन के अनुसार, 9 नवंबर 2025 को दोपहर करीब 12:30 बजे वर्दीधारी और सादे कपड़ों में आए कुछ पुलिसकर्मी जबरन उनके घर में घुस गए। आरोप है कि पुलिस ने उनकी गोतनी नीलम देवी के कमरे की अलमारी तोड़ दी और उसमें रखे कीमती जेवरात व नकदी उठा ले गई। पीड़िता का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई किसी डकैती से कम नहीं थी।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने साक्ष्य मिटाने के इरादे से घर में लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया और उनके तार उखाड़ दिए। जब घर की महिलाओं ने इसका विरोध किया और कार्रवाई का कारण पूछा, तो पुलिसकर्मियों ने उनके साथ भद्दी और जातिसूचक गालियां दीं।
मंजू देवी का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को सरेआम गोली मारने और पूरे परिवार को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी। इस दौरान परिवार के लोगों में दहशत फैल गई। घटना के दौरान पुलिस पर यह भी आरोप है कि उसने मंजू देवी के नाबालिग भतीजे हर्ष कुमार, जो दसवीं कक्षा का छात्र है, को जबरन अपने साथ उठा लिया। परिवार का दावा है कि उनका कोई भी सदस्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल नहीं है, इसके बावजूद उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया।
परिवार का कहना है कि जब हर्ष कुमार के चाचा सुधांशु रंजन मामले की जानकारी लेने चौक थाना पहुंचे, तो पुलिस ने कथित तौर पर उनका मोबाइल फोन छीन लिया और उन्हें भी थाने में बैठा लिया। फिलहाल सुधांशु का मोबाइल बंद आ रहा है, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है।
पीड़ित परिवार ने पटना एसएसपी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। आवेदन में आरोपी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई, बिना अपराध हिरासत में लिए गए नाबालिग छात्र की रिहाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। यह मामला पुलिस प्रशासन की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, जहां रक्षक पर ही भक्षक बनने के आरोप लग रहे हैं।