शरद पूर्णिमा 2025: चंद्रमा की अमृत वर्षा से भर जाएगा जीवन सौभाग्य, स्वास्थ्य और समृद्धि से

Jyoti Sinha
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शरद पूर्णिमा 2025: अमृत वर्षा, सौभाग्य और समृद्धि का दिव्य पर्वसनातन परंपरा में हर पर्व केवल आनंद और उत्सव का माध्यम नहीं होता, बल्कि वह प्रकृति के गूढ़ रहस्यों और ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ा संदेश भी देता है। इन्हीं पावन पर्वों में से एक है शरद पूर्णिमा, जिसे आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह दिन वर्ष का सबसे उज्ज्वल और शुभ रात्रि मानी जाती है, जब चंद्रमा अपनी सोलहों कलाओं के साथ पूर्ण रूप में प्रकाशित होता है और उसकी किरणों से अमृत समान ऊर्जा का संचार होता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा की शीतल किरणें शरीर, मन और आत्मा – तीनों को पवित्र करती हैं। कहा जाता है कि इन दिव्य किरणों से बरसने वाला अमृत मनुष्य को रोगमुक्त करता है, सौभाग्य और समृद्धि प्रदान करता है, तथा मानसिक शांति का वरदान देता है।शरद पूर्णिमा की रात खीर अर्पण का विशेष महत्व होता है। परंपरा है कि इस दिन घर में खीर बनाकर उसे ढककर खुले आकाश के नीचे रखा जाता है ताकि चंद्रमा की अमृतमयी किरणें उस पर पड़ें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।इस वर्ष की शरद पूर्णिमा विशेष संयोग लेकर आ रही है। पंचांग के अनुसार इस दिन हस्त नक्षत्र, वृद्धि योग और उन्नति मुहूर्त का दुर्लभ संगम बन रहा है, जिससे यह तिथि और भी शुभ मानी जा रही है।

खीर रखने का शुभ मुहूर्त: रात्रि 10:37 बजे से 12:09 बजे तक।इस अवधि में श्रद्धा और विधि-विधान से तैयार की गई खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने से न केवल शारीरिक और आर्थिक लाभ मिलता है, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और आंतरिक संतुलन का अनुभव भी होता है।शरद पूर्णिमा का यह पर्व केवल चंद्र-दर्शन का उत्सव नहीं, बल्कि यह प्रकृति और आत्मा के अद्भुत सामंजस्य का प्रतीक है। इस वर्ष की शरद पूर्णिमा अमृत वर्षा, सौभाग्य और दिव्यता का संदेश लेकर आ रही है — जो जीवन में नई रोशनी, शांति और समृद्धि का संचार करेगी

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