NEWS PR डेस्क ;—- नर्सिंग इंस्टीट्यूट के पदाधिकारियों ने दावा किया है कि नर्सिंग संस्थानों और डिप्लोमा डिग्री पाठ्यक्रमों को मान्यता देने का अधिकार इंडियन नर्सिंग काउंसिल के पास नहीं, बल्कि संबंधित राज्य सरकार और स्टेट नर्सिंग काउंसिल के पास है।
पदाधिकारियों के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारें देश में नर्सिंग एवं मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। नर्सिंग शिक्षा और पैरामेडिकल संस्थानों की मान्यता के संबंध में राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग और स्टेट नर्सिंग काउंसिल की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनका कहना है कि इंडियन नर्सिंग काउंसिल की भूमिका मुख्य रूप से नर्सिंग शिक्षा के लिए समान मानक और पाठ्यक्रम निर्धारित करने तथा राष्ट्रीय स्तर पर उन मानकों को लागू करने से जुड़ी है।
संस्थान के पदाधिकारियों ने अपने दावे के समर्थन में विभिन्न न्यायिक फैसलों का भी हवाला दिया है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय के 24 जुलाई 2017 के WP नंबर 25355-25357/2017 के फैसले का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही प्राइवेट नर्सिंग स्कूल एंड कॉलेज मैनेजमेंट एसोसिएशन से संबंधित वर्ष 2019 के मामले का भी हवाला दिया गया है। पदाधिकारियों का दावा है,!
कि इन मामलों में नर्सिंग डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रमों की मान्यता के अधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है।
वहीं, यह भी कहा गया है कि इन न्यायिक निर्णयों के आलोक में इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने 15 अक्टूबर 2020 को एक पत्र जारी किया था। पदाधिकारियों के अनुसार, इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि नर्सिंग संस्थानों को मान्यता देने का अधिकार आईएनसी के पास नहीं है और यह अधिकार संबंधित राज्य सरकार तथा स्टेट नर्सिंग काउंसिल के पास है।

बिहार प्राइवेट नर्सिंग इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष डॉ. कौशल कुमार गिरि एवं अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दी है। उनका कहना है कि नर्सिंग संस्थानों और विद्यार्थियों के हित में मान्यता से जुड़े अधिकार और नियमों को लेकर स्पष्टता बेहद जरूरी है।
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