एवरेस्ट की चोटी पर उतरने वाला ‘H125’ अब भारत में बनेगा, देश की पहली निजी हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन शुरू

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: भारत के एविएशन सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए 17 दिसंबर 2026 को कर्नाटक के वेमागल में देश की पहली निजी हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त रूप से इस परियोजना की शुरुआत की।

यह अत्याधुनिक सुविधा Airbus और Tata Advanced Systems Limited (TASL) के संयुक्त उपक्रम के तहत स्थापित की गई है। यहां विश्व प्रसिद्ध H125 हेलीकॉप्टर का निर्माण किया जाएगा।

एवरेस्ट पर उतरने वाला ‘लीजेंड’ अब भारत में बनेगा

H125 हेलीकॉप्टर, जिसे पहले AS350 B3 के नाम से जाना जाता था, ने 14 मई 2005 को इतिहास रचा था। फ्रांसीसी टेस्ट पायलट Didier Delsalle ने इसे सीधे माउंट एवरेस्ट की 29,029 फीट ऊंची चोटी पर उतारकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। हेलीकॉप्टर लगभग चार मिनट तक वहां स्थिर रहा—जो आज भी एक रिकॉर्ड है।

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H125 की प्रमुख विशेषताएं

क्षमता: 1 पायलट + 6 यात्री

रिकॉर्ड ऊंचाई: 8,848 मीटर

अधिकतम रफ्तार: 252 किमी/घंटा

रेंज: 662 किमी

उड़ान अवधि: लगभग 4.5 घंटे

‘मेड इन इंडिया’ का रोडमैप

हालांकि डिजाइन फ्रांस का है, लेकिन निर्माण अब भारत में होगा। रिपोर्टों के अनुसार पहला स्वदेशी रूप से असेंबल किया गया H125 वर्ष 2027 की शुरुआत तक तैयार हो जाएगा। शुरुआती उत्पादन क्षमता 10 हेलीकॉप्टर प्रति वर्ष होगी, जिसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। Mahindra Aerostructures हेलीकॉप्टर का फ्यूजलेज तैयार करेगी, जिससे घरेलू सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सेना और नागरिक उपयोग में बड़ा फायदा

इस प्लांट में H125 का सैन्य संस्करण H125M भी तैयार किया जा सकता है। यह हेलीकॉप्टर ‘हॉट एंड हाई’ परिस्थितियों जैसे हिमालयी ऊंचाई या रेगिस्तानी इलाकों में बेहतर प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। सर्च एंड रेस्क्यू, सीमावर्ती निगरानी, आपदा राहत और दुर्गम क्षेत्रों में यात्री परिवहन जैसे कार्यों में इसकी उपयोगिता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को मजबूती

उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस की साझेदारी समुद्र की गहराइयों से लेकर पर्वतों की ऊंचाइयों तक फैली है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत में बने ये हेलीकॉप्टर भविष्य में अन्य देशों को निर्यात भी किए जा सकते हैं।

राष्ट्रपति मैक्रों ने भी द्विपक्षीय सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देश स्वतंत्र और संतुलित वैश्विक व्यवस्था के पक्षधर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत को वैश्विक हेलीकॉप्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

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