वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से बदलेगी दक्षिण बिहार की तस्वीर, सफर होगा आधे समय में पूरा

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 30 मई। बिहार को जल्द ही देश की एक महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना का बड़ा लाभ मिलने जा रहा है। वाराणसी से कोलकाता तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे राज्य के कई जिलों के विकास की नई इबारत लिख सकता है। करीब 610 किलोमीटर लंबे इस हाईस्पीड कॉरिडोर के निर्माण से बिहार के दक्षिणी हिस्से में कनेक्टिविटी, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा। परियोजना के तहत कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जैसे जिले सीधे हाईस्पीड सड़क नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। इससे उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच आवागमन पहले के मुकाबले कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगा।

वर्तमान में वाराणसी से कोलकाता पहुंचने में 12 से 14 घंटे तक का समय लग जाता है, लेकिन एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यह यात्रा लगभग 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा व्यापारियों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और आम यात्रियों को मिलेगा। माल ढुलाई की गति बढ़ने के साथ परिवहन लागत में भी कमी आने की संभावना है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दक्षिण बिहार में आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार देगी। जिन क्षेत्रों से एक्सप्रेसवे गुजरेगा, वहां वेयरहाउस, होटल, ट्रांसपोर्ट और छोटे-बड़े उद्योगों के विकसित होने की संभावना है।

गया और औरंगाबाद जैसे जिलों को भविष्य में लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित किए जाने की भी उम्मीद जताई जा रही है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और निवेशकों की रुचि भी इन क्षेत्रों की ओर बढ़ेगी।

यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के वाराणसी रिंग रोड के पास बरहौली गांव से शुरू होगा। इसके बाद यह बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जिलों से होकर झारखंड में प्रवेश करेगा।

झारखंड में यह चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो और पीटरबार क्षेत्रों को जोड़ेगा। आगे चलकर सड़क पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, हुगली और हावड़ा से गुजरते हुए कोलकाता तक पहुंचेगी।

परियोजना के झारखंड और पश्चिम बंगाल हिस्से में पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया के कारण निर्माण कार्य धीमा पड़ा था। अब आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद काम में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक वन और वन्यजीव क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए विशेष सुरक्षा योजना तैयार की गई है, ताकि बाघों और हाथियों के प्राकृतिक आवागमन पर असर न पड़े। सरकार का लक्ष्य मार्च 2028 तक इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे परियोजना को पूरा करने का है।

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