NEWS PR डेस्क : मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए वोट डालने के बाद एक ऐसा बयान दिया जिसने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी। उन्होंने साफ कहा कि अब वह आगे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और उनकी राजनीतिक विरासत उनके बच्चे संभालेंगे।
उनके इस फैसले के बाद मोकामा की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या उनके हटने से पूर्व सांसद सूरजभान सिंह का प्रभाव क्षेत्र में बढ़ेगा या फिर अनंत सिंह का ही राजनीतिक दबदबा किसी न किसी रूप में बना रहेगा।
राजनीतिक सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं
अनंत सिंह का राजनीति में प्रवेश भी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपने बड़े भाई Dilip Singh की राजनीतिक विरासत संभाली, जो कभी लालु प्रसाद यादव के शासनकाल में मंत्री रह चुके थे। भाई के निधन के बाद अनंत सिंह ने मोकामा में अपनी पकड़ मजबूत की और 2005 में Nitish Kumar की पार्टी जेडीयू के टिकट पर पहली बार विधायक बने।
इसके बाद उन्होंने लगातार जीत का सिलसिला जारी रखा और 2005, 2010, 2015, 2020 और 2025 में भी चुनाव जीतकर मोकामा में अपना वर्चस्व कायम रखा। खास बात यह रही कि 2015, 2020 और 2025 के चुनाव उन्होंने जेल में रहते हुए जीते, जो इलाके में उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है।
सूरजभान सिंह से पुरानी सियासी टक्कर
मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह और सूरजभान सिंह की प्रतिद्वंद्विता काफी पुरानी मानी जाती है। पिछले विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह ने सूरजभान सिंह की पत्नी Veena Devi को हराया था। ऐसे में अब उनके चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या सूरजभान सिंह को इस बार मौका मिल सकता है।
अपराध, हमले और ‘छोटे सरकार’ की छवि
अनंत सिंह का जीवन विवादों और हमलों से भी घिरा रहा है। 2004 में उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें उन्हें सीने में गोली लगी थी। डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन ऑपरेशन के बाद उनकी जान बच गई।
इसके अलावा 2025 में सोनू-मोनू गैंग के साथ उनकी टक्कर भी चर्चा में रही, जब मोकामा में उनके काफिले पर 70 से ज्यादा राउंड फायरिंग हुई थी। इलाके में उनके समर्थक उन्हें ‘छोटे सरकार’ के नाम से पुकारते हैं। एके-47 रखने, अजगर पालने और घोड़ों के शौक जैसी कई कहानियां भी उनके साथ जुड़ी रही हैं।
चुनाव नहीं लड़ने का कारण क्या?
जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह आगे लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल जेल में हैं और आगे का फैसला पूरी तरह नीतीश कुमार पर छोड़ते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनंत सिंह भविष्य में लोकसभा की राजनीति में किस्मत आजमा सकते हैं, जबकि मोकामा सीट से अपने बेटे को चुनाव मैदान में उतार सकते हैं।
कानूनी मामलों से भी घिरे रहे
करीब 65 वर्ष के अनंत सिंह पर हत्या, अपहरण और आर्म्स एक्ट सहित कई मामले दर्ज हैं। 2019 में उनके घर से एके-47 और हैंड ग्रेनेड मिलने के मामले में उन्हें सजा भी हुई थी, हालांकि बाद में उन्हें अदालत से राहत मिली। फिलहाल वह 2025 में हुई एक हत्या के मामले में जेल में बंद हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि मोकामा की राजनीति में अगला बड़ा चेहरा कौन होगा—क्या अनंत सिंह का परिवार उनकी विरासत संभालेगा या फिर सूरजभान सिंह की राजनीतिक किस्मत चमकेगी?