NEWS PR डेस्क: पटना, 21 जून। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के छात्र-छात्राओं के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि अगले शैक्षणिक सत्र से बिहार के सभी स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में योग को शामिल किया जाएगा। सरकार इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगी।
पटना के कंकड़बाग स्थित पाटलिपुत्र खेल परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय योग दिवस समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह घोषणा की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वयं योगाभ्यास भी किया और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
स्वास्थ्य मंत्री के प्रस्ताव को मिली मंजूरी
योग दिवस समारोह में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने मुख्यमंत्री के समक्ष एक विशेष प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि बढ़ते तनाव और बदलती जीवनशैली के दौर में छात्रों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए स्कूलों और कॉलेजों के दैनिक कार्यक्रम में योग और ध्यान को शामिल किया जाना चाहिए।

निशांत कुमार ने सुझाव दिया कि शैक्षणिक संस्थानों में प्रतिदिन लगभग आधे घंटे का योग एवं मेडिटेशन सत्र आयोजित किया जाए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह स्वैच्छिक व्यवस्था होगी। छात्रों पर इसमें भाग लेने का कोई दबाव नहीं होगा और न ही इसकी उपस्थिति या परीक्षा अनिवार्य होगी।
अगले साल से पाठ्यक्रम में जुड़ेगा योग
स्वास्थ्य मंत्री के प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंच से ही घोषणा कर दी कि अगले वर्ष से योग को स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह पीटी और अन्य गतिविधियां स्कूलों में कराई जाती हैं, उसी तरह योग को भी शिक्षा व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि छात्र स्वस्थ रहें और बेहतर जीवनशैली अपनाएं।
मुंगेर की योग परंपरा का किया जिक्र
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में बिहार की योग परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुंगेर विश्व स्तर पर योग के प्रमुख केंद्रों में शामिल है और आज भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग वहां योग सीखने आते हैं।
उन्होंने कहा, “जिस जिले से मैं आता हूं, उसी जिले से योग का केंद्र दुनिया भर में प्रसिद्ध हुआ। आज भी दुनिया के लोग मुंगेर की धरती पर आकर योग सीखते हैं और उसे आगे बढ़ाते हैं।”
छात्रों के स्वास्थ्य पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को स्वस्थ और खुशहाल जीवन के लिए तैयार करना भी है। योग को पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला इसी सोच का हिस्सा है।
सरकार के इस फैसले को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।
