नीतीश सरकार का बड़ा तोहफा: 94 लाख गरीब परिवारों को मिलेंगे 2 लाख रुपये

Puja Srivastav
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N EWS PR डेस्क : चयनित 94 लाख गरीब परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए राज्य सरकार 2 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता देने की योजना पर काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में बिहार को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाना है।

स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में मरीजों की संख्या 39 से बढ़कर 11,600 तक पहुंच गई है। वहीं, सड़क और पुल निर्माण के विस्तार से अब दूर-दराज के इलाकों से पटना तक की यात्रा महज पांच घंटे में संभव हो गई है।

मोतिहारी में समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विकास और गरीबों के कल्याण से जुड़ी कई अहम घोषणाएं कीं। यात्रा के दूसरे दिन पूर्वी चंपारण पहुंचे मुख्यमंत्री ने करोड़ों रुपये की योजनाओं का ऐलान करने के साथ ही राज्य के 94 लाख गरीब परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की सीमा बढ़ाने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि बिहार अब पिछड़ेपन से बाहर निकलकर देश के अग्रणी राज्यों में अपनी जगह बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

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मोतिहारी में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चिह्नित 94 लाख गरीब परिवारों को रोजगार से जोड़ने के लिए दी जा रही 2 लाख रुपये की सहायता जरूरत के अनुसार बढ़ाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता हर गरीब को सम्मान देना और उनके जीवन को आसान बनाना है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग और राज्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से बिहार अगले पांच साल में देश के अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल होगा। समृद्धि यात्रा के दौरान उन्होंने पूर्वी चंपारण जिले में 138 करोड़ रुपये की योजनाओं का उद्घाटन किया, जबकि 24 करोड़ रुपये की नई योजनाओं का शिलान्यास भी किया गया।

स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने आंकड़ों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि पहले बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद कमजोर थी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में महीने भर में औसतन सिर्फ 39 मरीज ही पहुंचते थे, यानी प्रतिदिन एक-दो मरीज। लेकिन सरकार के लगातार प्रयासों के चलते अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 11,600 मरीज प्रति माह हो गया है, जिसका मतलब है कि रोजाना लगभग 350 से 400 लोग इलाज के लिए अस्पताल आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2006 से राज्य के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और दवाओं की समुचित व्यवस्था लागू की गई है।

बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी को लेकर मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि अब राज्य के दूर-दराज इलाकों से भी करीब 5 घंटे में पटना पहुंचा जा सकता है। पहले यह समय सीमा 6 घंटे तय की गई थी, जिसे 2016 में ही हासिल कर लिया गया था। इसके बाद पुल-पुलियों, रेल ओवरब्रिज, बाइपास और एलिवेटेड सड़कों के व्यापक निर्माण से यात्रा समय और घटा है।
स्थानीय विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि लंबे समय से बंद पड़ी बारा चीनी मिल को फिर से शुरू किया जाएगा। साथ ही रक्सौल एयरपोर्ट के निर्माण को गति देने के लिए इसी महीने टेंडर जारी कर आगे की प्रक्रिया तेज करने की घोषणा भी की गई है।

महिला सशक्तिकरण को सरकार की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार ने इस दिशा में देश को नई राह दिखाई है। वर्ष 2006 में पंचायतों और 2007 में नगर निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने वाला बिहार पहला राज्य बना। आगे चलकर 2013 में पुलिस भर्ती में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया, जिसका परिणाम यह है कि आज बिहार में देश में सबसे ज्यादा महिला पुलिसकर्मी कार्यरत हैं।

उन्होंने कहा कि 2016 से सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण मिलने से समाज की आधी आबादी को मुख्यधारा से जोड़ने में बड़ी मदद मिली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भरोसा जताया कि बिहार का विकास अभियान लगातार आगे बढ़ता रहेगा और आने वाले समय में राज्य नई उपलब्धियों और प्रगति के नए मानक स्थापित करेगा।

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