NEWS PR डेस्क: राज्यसभा चुनाव 2026 के बीच बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजे जाने की तैयारी चल रही है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय जदयू नेतृत्व को ही लेना है, लेकिन संभावित राजनीतिक फेरबदल को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, अगर नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में जाते हैं तो बिहार में सत्ता समीकरण भी बदल सकता है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि उनके राज्यसभा जाने के बाद राज्य का अगला मुख्यमंत्री भाजपा से हो सकता है। वहीं नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को बिहार की राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है और उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
इन चर्चाओं के बीच जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा बुधवार सुबह नई दिल्ली से पटना पहुंचे, जिसके बाद सियासी हलचल और तेज हो गई। इससे पहले तक चर्चा थी कि निशांत कुमार राज्यसभा के जरिए अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर सकते हैं, लेकिन अब कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी जगह खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि नामांकन से जुड़ी अधिकांश कागजी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और वे 5 मार्च को नामांकन दाखिल कर सकते हैं।
गौरतलब है कि नीतीश कुमार लगभग दो दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। जीतन राम मांझी के कुछ महीनों के कार्यकाल को छोड़ दें तो लंबे समय तक वे लगातार मुख्यमंत्री पद पर बने रहे हैं।
इधर, निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने को लेकर भी पिछले कुछ महीनों से चर्चाएं जारी हैं। हाल के दिनों में वे कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई दिए हैं। 1 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जन्मदिन के मौके पर भी वे उनके साथ नजर आए थे, जहां उन्होंने पिता को केक खिलाया और हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की थी।
नीतीश कुमार के संभावित तौर पर राष्ट्रीय राजनीति में जाने और निशांत कुमार को बिहार में बड़ी भूमिका दिए जाने के मुद्दे पर पटना में होने वाली एनडीए विधायकों की बैठक में अंतिम फैसला हो सकता है।