NEWS PR डेस्क : लौकहा प्रखंड के किसान अब केले की खेती से आर्थिक मजबूती हासिल कर रहे हैं। पारंपरिक फसलों की तुलना में यह फसल चार-पांच गुना अधिक लाभकारी साबित हो रही है। एक एकड़ भूमि पर लगभग 50 हजार रुपये की लागत लगाकर किसान 1.5 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।
आमतौर पर खेती को ऐसा पेशा माना जाता है जिसमें मेहनत के बावजूद किसानों को पर्याप्त लाभ नहीं मिलता, लेकिन लौकहा प्रखंड के कुछ किसानों ने केले की खेती कर इस धारणा को बदल दिया है। यहां केले की खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभदायक साबित हो रही है और कई परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
लौकहा पंचायत के झहुरा गांव और हरदी पश्चिम पंचायत के ईटहरी गांव, जो तिलाबे नदी के किनारे बसे हैं, में बड़े पैमाने पर केले की खेती हो रही है। इन गांवों के किसान परंपरागत फसलों की तुलना में केले की खेती से कई गुना अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। झहुरा गांव के किसान धनिकलाल यादव बताते हैं कि धान, गेहूं या अन्य फसलों के मुकाबले केले की खेती में चार-पांच गुना ज्यादा लाभ होता है। एक एकड़ में केले की खेती करने पर लगभग 50 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि फसल लगभग 12 महीने में तैयार होकर 1.5 लाख रुपये तक की आमदनी देती है।