NEWS PR डेस्क: मधुबनी, 14 जून। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत मिली वित्तीय सहायता ने मधुबनी जिले की एक महिला उद्यमी की जिंदगी बदल दी है। कलुआही प्रखंड के चचराहा, बासोपट्टी निवासी सिंपल कुमारी ने डिटर्जेंट पाउडर निर्माण इकाई स्थापित कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उनके इस प्रयास से न केवल उन्हें स्वरोजगार मिला है, बल्कि स्थानीय स्तर पर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
स्नातकोत्तर शिक्षित सिंपल कुमारी ने पारिवारिक व्यवसायिक माहौल से प्रेरित होकर उद्योग स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत 9.90 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त की। इस सहायता राशि का उपयोग करते हुए वर्ष 2024 में उन्होंने डिटर्जेंट पाउडर निर्माण इकाई की स्थापना की और उत्पादन कार्य शुरू किया।
व्यवसाय की शुरुआत आसान नहीं रही। नए उत्पाद को बाजार में पहचान दिलाना और ग्राहकों का भरोसा जीतना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। हालांकि, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद, बेहतर सेवा और लगातार प्रयासों के दम पर उन्होंने धीरे-धीरे स्थानीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना ली। वर्तमान में उनके द्वारा निर्मित डिटर्जेंट पाउडर को ग्राहकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।

सिंपल कुमारी की इकाई स्थानीय उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण डिटर्जेंट पाउडर उपलब्ध करा रही है। उनके उद्यम से पांच कुशल कारीगरों को भी रोजगार मिला है, जिससे कई परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। साथ ही समाज में उनकी पहचान और सम्मान भी बढ़ा है।
भविष्य को लेकर सिंपल कुमारी की योजनाएं भी काफी महत्वाकांक्षी हैं। वह अपने व्यवसाय का विस्तार करना चाहती हैं, जिसके लिए अतिरिक्त पूंजी निवेश की आवश्यकता होगी। उनका मानना है कि उत्पादन क्षमता बढ़ने से और अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकेगा तथा स्थानीय उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।
युवाओं और नए उद्यमियों को प्रेरित करते हुए सिंपल कुमारी ने कहा कि बिहार में उद्योग और स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। यदि युवा दृढ़ संकल्प, मेहनत और सही योजना के साथ आगे बढ़ें तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि समाज और प्रदेश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से सिंपल कुमारी की सफलता की यह कहानी उन युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है, जो स्वरोजगार के जरिए अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।
