बिहार की तीन पारंपरिक कलाओं को मिला GI टैग, मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने जताई प्रसन्नता

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 14 जून। बिहार की समृद्ध कला और शिल्प परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। नालंदा की प्रसिद्ध बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, गया के पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पारंपरिक पिढ़िया पेंटिंग को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि पर बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने प्रसन्नता व्यक्त की है।

मंत्री ने कहा कि जीआई टैग मिलने से इन पारंपरिक कलाओं और शिल्पों की विशिष्ट पहचान को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन उत्पादों की प्रामाणिकता और स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह बिहार की सांस्कृतिक विरासत के लिए गर्व का क्षण है।

नालंदा की बावन बूटी साड़ी अपनी अनूठी बुनाई, पारंपरिक डिजाइनों और उत्कृष्ट हस्तकला के लिए प्रसिद्ध है। वहीं गया का पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट सदियों पुरानी शिल्प परंपरा का प्रतीक माना जाता है, जो पत्थरों पर बारीक नक्काशी के लिए देशभर में पहचान रखता है। इसके अलावा भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग बिहार की प्रमुख लोक चित्रकला परंपराओं में शामिल है, जिसमें लोक जीवन, पारिवारिक संस्कार और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिलती है।

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डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि बिहार सरकार और कला एवं संस्कृति विभाग राज्य की पारंपरिक कला, लोक संस्कृति और शिल्प विधाओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि GI टैग जैसी मान्यताएं इन कलाओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मंत्री ने इस उपलब्धि पर राज्य के शिल्पकारों, बुनकरों, कलाकारों और संबंधित संस्थाओं को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि बिहार की पारंपरिक कला और शिल्प भविष्य में और अधिक सशक्त पहचान बनाएंगे।

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