NEWS PR डेस्क: पटना, 01 अप्रैल। बिहार की सियासत में एक बार फिर दिलचस्प संदेश देने वाली तस्वीर सामने आई है। राज्यसभा चुनाव के दौरान वोटिंग से दूरी बनाने वाले विधायकों को अब विधानसभा समितियों में अहम जिम्मेदारी देकर राजनीतिक संकेत देने की कोशिश की गई है। इस फैसले को सत्ता पक्ष की रणनीतिक चाल के तौर पर देखा जा रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की मंजूरी के बाद 19 समितियों का गठन किया गया है। इस गठन में खास बात यह रही कि कांग्रेस के मनोहर प्रसाद सिंह और आरजेडी के फैसल रहमान को समिति का अध्यक्ष बनाकर अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि ये दोनों राज्यसभा चुनाव के दौरान वोटिंग से दूर रहे थे।
इसी कड़ी में मोकामा के चर्चित विधायक अनंत सिंह को भी ‘गिफ्ट’ मिला है। उन्हें पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति का सदस्य बनाया गया है, जिससे उनकी जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ गई है। वहीं बाहुबली छवि वाले मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह को पर्यटन उद्योग समिति का चेयरमैन बनाया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ जिम्मेदारी बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए नाराज या अलग रुख अपनाने वाले विधायकों को साधने की कोशिश भी की गई है। खासतौर पर राज्यसभा चुनाव के बाद बने राजनीतिक माहौल में यह कदम संतुलन बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
समितियों के गठन में जहां कई नए चेहरों को मौका मिला है, वहीं प्रेम कुमार खुद भी दो अहम समितियों—नियम समिति और सामान्य प्रयोजन समिति—की कमान संभालेंगे। इससे साफ है कि शीर्ष नेतृत्व पर पकड़ बनाए रखने के साथ-साथ अन्य नेताओं को भी संतुलित तरीके से जिम्मेदारी दी गई है।
कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा की नई समितियों का गठन सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सियासी संदेश भी है—जिसमें नाराजगी को साधने, संतुलन बनाने और नेतृत्व को मजबूत रखने की कोशिश साफ दिखाई देती है।