NEWS PR डेस्क: मुजफ्फरपुर, 5 अप्रैल। गर्मी के आगमन के साथ ही मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन चमकी बुखार (एईएस) को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिले में इस गंभीर बीमारी की रोकथाम के लिए व्यापक जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत जिले की सभी 373 पंचायतों में प्रत्येक शनिवार को “संध्या चौपाल” आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जाएगा।
अभियान की अगुवाई करते हुए जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने मुसहरी प्रखंड के मनिका बिशनपुर चांद पंचायत स्थित उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित संध्या चौपाल में भाग लिया। इस मौके पर उप विकास आयुक्त श्रेष्ठ अनुपम और सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार सहित बड़ी संख्या में जीविका दीदी, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, विकास मित्र और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि चमकी बुखार जैसी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए प्रशासनिक सतर्कता के साथ-साथ जनभागीदारी भी बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने और “जीरो डेथ” के लक्ष्य को हासिल करने का निर्देश दिया।
लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल ले जाएं
जिलाधिकारी ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में चमकी बुखार के लक्षण दिखते ही बिना देरी नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं। उन्होंने बताया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित डॉक्टर, दवाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। थोड़ी सी लापरवाही भी बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
गर्मी में विशेष सावधानी जरूरी
बढ़ती गर्मी को देखते हुए बच्चों के खान-पान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई। उन्होंने कहा कि बच्चों को समय पर भोजन देना, पर्याप्त पानी पिलाना और तेज धूप से बचाना बेहद जरूरी है। इस दौरान कुपोषित बच्चों के परिवारों को जीविका समूह द्वारा तैयार फूड बास्केट भी वितरित की गई।
घर-घर सर्वे और निगरानी के निर्देश
जिलाधिकारी ने आशा, आंगनबाड़ी और जीविका कर्मियों को निर्देश दिया कि वे 0 से 15 वर्ष तक के बच्चों की सूची बनाकर नियमित निगरानी करें। समय पर पहचान और निगरानी से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
क्या है चमकी बुखार
चमकी बुखार मुख्यतः बच्चों में होने वाली गंभीर बीमारी है, जो अत्यधिक गर्मी, कुपोषण, खाली पेट सोने और शरीर में ग्लूकोज की कमी के कारण होती है। डिहाइड्रेशन और अस्वच्छ खान-पान भी इसके प्रमुख कारण हैं।
प्रमुख लक्षण
तेज बुखार
शरीर में ऐंठन (चमकी आना)
बेहोशी या सुस्ती
बार-बार उल्टी
अत्यधिक कमजोरी
बचाव के उपाय
बच्चों को कभी खाली पेट न सुलाएं
पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ दें
तेज धूप से बचाएं
पौष्टिक और सुपाच्य भोजन दें
स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
प्राथमिक उपचार और सुविधा
सिविल सर्जन ने बताया कि लक्षण दिखने पर बच्चे को बाईं करवट लिटाएं, शरीर को ठंडे पानी से पोंछें और तुरंत अस्पताल पहुंचाएं। 102 या 108 एम्बुलेंस सेवा का उपयोग किया जा सकता है। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
जागरूकता अभियान को मिलेगा विस्तार
प्रशासन द्वारा पंचायत स्तर पर चौपाल, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से जागरूकता अभियान को और तेज किया जाएगा। पोस्टर, बैनर और माइकिंग के जरिए गांव-गांव तक संदेश पहुंचाया जाएगा।
डीएम की अपील
जिलाधिकारी ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि जागरूकता और सतर्कता से इस बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने आम लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि बच्चों का नियमित भोजन और स्वास्थ्य देखभाल ही सबसे बड़ा बचाव है।