बोधगया में धर्म-संस्कृति संगम का तीसरा दिन, आध्यात्मिकता और राष्ट्रभावना का संदेश

“बोधगया से गूंजा एकता और सद्भाव का संदेश — धर्म और संस्कृति का महा संगम जारी

Rashmi Tiwari

अंतरराष्ट्रीय धर्मनगरी बोधगया स्थित मगध विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे चार दिवसीय “धर्म संस्कृति संगम” के तीसरे दिन आयोजन और अधिक भव्य हो गया। 6 मई से शुरू हुआ यह महासंगम 9 मई तक चलेगा, जिसमें देशभर से संत, महात्मा, धर्माचार्य, विद्वान और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं।


राज्यपाल की उपस्थिति से बढ़ा महत्व
तीसरे दिन के विशेष सत्र में बिहार के राज्यपाल की उपस्थिति ने कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में बौद्ध भिक्षु, संत समाज, स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल
पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और धर्माचार्यों के संदेशों ने माहौल को भक्तिमय और प्रेरणादायक बना दिया। आयोजन समिति के अनुसार, इस संगम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करना है।


बिहार को बताया धर्म-संस्कृति का संगम स्थल
सभा को संबोधित करते हुए बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने बिहार को धर्मों और संस्कृतियों की संगम भूमि बताया। उन्होंने कहा कि नालंदा, गया और बोधगया पूरी दुनिया को एकता और सह-अस्तित्व का संदेश देते हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जन्म से मुस्लिम होने के बावजूद उन्हें सभी धर्मों से गहरा लगाव रहा है। हिंदू, सिख, ईसाई और बौद्ध परंपराओं से उन्होंने प्रेरणा ली है। उन्होंने भगवान विष्णु के प्रति अपनी आस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में एकता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता पर जोर
राज्यपाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कहा कि देश की सुरक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की आंतरिक एकता और जागरूकता पर भी निर्भर करती है। सभी धर्मों को राष्ट्रहित में एकजुट रहना होगा। मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार से ऐसा संदेश निकलना चाहिए जो पूरे देश और पड़ोसी देशों तक शांति और सद्भाव का संदेश पहुंचाए। उन्होंने कहा कि भारत सभी धर्मों की मातृभूमि है और यहां से विभाजन नहीं बल्कि एकता का संदेश जाना चाहिए।

गया से आशिष कुमार की रिपोर्ट

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