NEWS PR डेस्क: पटना, 24 मई। बिहार की राजनीति में भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव की बीजेपी नेताओं के साथ हुई मुलाकात ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के जन्मदिन के मौके पर पटना स्थित आवास पर पहुंचे खेसारी लाल यादव की मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। खासकर ऐसे समय में, जब बीजेपी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और पूर्वांचल की राजनीति को लेकर अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटी है।
खेसारी लाल यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी मुलाकात की है, जिसने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया। माना जा रहा है कि भोजपुरी बेल्ट में मजबूत पकड़ रखने वाले चेहरों को बीजेपी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर सकती है।
हालांकि, खेसारी लाल यादव ने साफ तौर पर कहा है कि उनकी यह मुलाकात सिर्फ जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के लिए थी और इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अभी भी राष्ट्रीय जनता दल के साथ हैं और वहीं रहेंगे। खेसारी ने नितिन नवीन को अपना बड़ा भाई बताते हुए कहा कि एक बिहारी के इतने बड़े पद पर पहुंचने की खुशी में वह उन्हें बधाई देने आए थे।
लेकिन राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात मानने को तैयार नहीं हैं। इसकी वजह यह भी है कि खेसारी लाल यादव पहले आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं और चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी और राम मंदिर को लेकर उनके कई बयान काफी विवादों में रहे थे। उस समय बीजेपी से जुड़े भोजपुरी फिल्म जगत के बड़े चेहरे रवि किशन, मनोज तिवारी और दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने खुलकर खेसारी लाल पर हमला बोला था।
चुनाव हारने के बाद खेसारी लाल यादव राजनीतिक रूप से कुछ शांत जरूर पड़े, लेकिन अब बीजेपी नेताओं के साथ उनकी नजदीकी ने एक बार फिर चर्चा को गर्म कर दिया है। माना जा रहा है कि अगर बीजेपी भोजपुरी क्षेत्र में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है, तो खेसारी जैसे बड़े स्टार चेहरे को साथ लाने की कोशिश कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपी चुनाव में भोजपुरी स्टार प्रचारकों की भूमिका अहम हो सकती है। बीजेपी पहले से ही रवि किशन, मनोज तिवारी, निरहुआ और पवन सिंह जैसे भोजपुरी चेहरों का राजनीतिक तौर पर इस्तेमाल कर रही है। ऐसे में अगर खेसारी लाल यादव भी भविष्य में बीजेपी के करीब आते हैं, तो यह पूर्वांचल की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
फिलहाल खेसारी लाल यादव ने आरजेडी के साथ रहने की बात दोहराई है, लेकिन राजनीति में संभावनाओं के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। यही वजह है कि अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि यह मुलाकात केवल एक जन्मदिन की औपचारिकता थी या फिर आने वाले बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत।