पटना में नाव परिचालन को लेकर प्रशासन सख्त, ओवरलोडिंग और अवैध संचालन पर होगी कड़ी कार्रवाई

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 39 मई। गंगा समेत अन्य नदियों में नाव दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए पटना जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। जिलाधिकारी पटना और वरीय पुलिस अधीक्षक पटना ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों, अंचल अधिकारियों और थानाध्यक्षों को नावों के सुरक्षित परिचालन के लिए तय मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।

समाहरणालय स्थित सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि नाव परिचालन में लापरवाही, ओवरलोडिंग या बिना निबंधन संचालन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले नाव मालिकों और नाविकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि सभी नावों का निबंधन अनिवार्य किया जा रहा है। जिला परिवहन पदाधिकारी को अभियान चलाकर नावों का रजिस्ट्रेशन कराने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए अंचलवार रोस्टर तैयार किया जा रहा है। अभियान समाप्त होने के बाद बिना निबंधन संचालित होने वाली नावों को जब्त किया जाएगा।

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प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नावों की जांच मोटरयान निरीक्षक (एमवीआई) द्वारा की जाएगी और सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाली नावों को ही परिचालन की अनुमति दी जाएगी। प्रत्येक नाव पर उसकी क्षमता, नाविक का नाम, मोबाइल नंबर, निबंधन संख्या तथा प्रतिनियुक्त गोताखोर का विवरण अंकित करना अनिवार्य होगा।

बैठक में अधिकारियों ने कहा कि नावों पर क्षमता से अधिक सवारी, मवेशी या वाहन लादना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही बिना लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, फर्स्ट एड किट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के नाव संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

जिलाधिकारी ने बताया कि पटना जिले के दीघा पाटीपुल घाट, गांधी घाट, कलेक्ट्रेट घाट, कच्ची दरगाह घाट, गायघाट, नासरीगंज घाट, हल्दी छपरा घाट और अन्य प्रमुख घाटों पर बड़ी संख्या में लोग नाव से आवागमन करते हैं। निरीक्षण के दौरान कई जगहों पर ओवरलोडिंग और मानक संचालन प्रक्रिया के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई हैं, जिसे रोकने के लिए विशेष निगरानी अभियान चलाया जाएगा।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी भी परिस्थिति में नाव परिचालन की अनुमति नहीं होगी। खराब मौसम, तेज हवा, आंधी या तूफान की स्थिति में भी नाव संचालन पर पूरी तरह रोक रहेगी।

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्य घाटों पर आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और गोताखोरों की तैनाती की जाएगी। साथ ही पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए लगातार लोगों को सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक किया जाएगा।

जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को बड़े घाटों पर नाव संचालकों के साथ बैठक कर नियमों की जानकारी देने और उनका पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। वहीं छोटे घाटों पर अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष यह जिम्मेदारी निभाएंगे।

प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे केवल पंजीकृत और सुरक्षा मानकों का पालन करने वाली नावों का ही उपयोग करें तथा ओवरलोडेड नावों में यात्रा करने से बचें।

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